मध्यप्रदेश में कंप्यूटर बाबा के नाम से प्रसिद्ध नामदेव दास त्यागी के खिलाफ अवैध कब्जे और निर्माण को लेकर कार्रवाई की गई। इस कार्रवाई में बाबा को प्रिवेंटिव डिटेंशन के तहत हिरासत मे लेकर इंदौर सेंट्रल जेल में रखा गया। बता दें कि कंप्यूटर बाबा ने 28 सीटों पर उपचुनाव में शिवराज सरकार के खिलाफ लोकतंत्र बचाओ यात्रा निकाली थी।
इंदौर नगर निगम के अधिकारियों ने आठ नवंबर को कंप्यूटर बाबा के अवैध निर्माण को ध्वस्त कर दिया था। इस कार्रवाई में कंप्यूटर बाबा समेत छह लोगों को गिरफ्तार किया गया था। कंप्यूटर बाबा के आश्रम से एक राइफल, एक एयरगन और एक कृपाण बरामद किया गया।
पुलिस को यहां छापेमारी में बेनामी संपत्ति के कागजात मिले और बैंक खातों से जुड़े दस्तावेज मिले, इनकी जांच की जा रही है।
दिग्विजय सिंह के साथ थे गहरे संबंध
कंप्यूटर बाबा का असली नाम नामदेव दास त्यागी है और तेज दिमाग होने की वजह से कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने उन्हें यह नाम दिया था। बाबा को कंप्यूटर की ज्यादा नॉलेज नहीं था, उनके लिए कंप्यूटर भी उनका स्टाफ चलाता था। 2018 में पहली बार कंप्यूटर बाबा का नाम सुर्खियों में आया था।
दिग्विजय सिंह के लिए किया मिर्ची यज्ञ
कंप्यूटर बाबा उर्फ नामदेव दास त्यागी का ताल्लुक राजनीति से रहा है। कंप्यूटर बाबा ने लोकसभा चुनाव में साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर का विरोध किया था और अपने जानकार दिग्विजय सिंह को जिताने के लिए मिर्ची यज्ञ किया था। वहीं दिग्विजय सिंह ने बाबा के आश्रम को तोड़ने की निंदा की थी और इसे बदले की राजनीति बताया था।
कंप्यूटर बाबा को मिला था राज्यमंत्री का दर्जा
मार्च 2018 में नर्मदा नदी के किनारे पेड़ लगाने में हुए कथित घोटाले को लेकर यात्रा निकाली गई थी, जिसमें शिवराज सरकार ने पौधारोपण को बढ़ावा दिया और एक कमिटी का गठन किया। इस कमिटी में कंप्यूटर बाबा को शामिल किया गया और उन्हें राज्यमंत्री का दर्जा मिला।
लेकिन जब सरकार बदली तो कंप्यूटर बाबा ने भाजपा का दामन छोड़ कांग्रेस का हाथ पकड़ लिया। इसके बाद कांग्रेस सरकार ने भी नर्मदा विकास के लिए समिति बनाकर बाबा को राज्यमंत्री का दर्जा दिया।