मध्य प्रदेश के जबलपुर में लोकायुक्त की विशेष अदालत ने डिंडौरी के नापतौल निरीक्षक आरएस चौधरी को भ्रष्टाचार का दोषी पाया है। चौधरी 10 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ पकड़े गए थे। लोकायुक्त ने उन्हें ट्रैप किया था। चौधरी पर 40 हजार रुपये जुर्माना लगाया गया है और उसे चार साल की सजा सुनाई गई है। लोकायुक्त के विशेष जज अजय कुमार सिंह ने यह फैसला सुनाया।
लोकायुक्त के विशेष लोक अभियोजक प्रशांत शुक्ला ने बताया कि डिंडौरी के जितेंद्र विश्वकर्मा इलेक्ट्रॉनिक तौल-कांटे की मरम्मत और बेचने का काम करता है। उसका लाइसेंस खत्म हो गया था। इस वजह से उसने नवीनीकरण का आवेदन दिया था। इस काम को करने के लिए चौधरी ने विश्वकर्मा से 10 हजार रुपये की रिश्वत मांगी थी। विश्वकर्मा ने इसकी शिकायत लोकायुक्त एसपी से की थी। इसके बाद ट्रैप दल बनाया गया। उसने 22 मार्च 2018 को उपनियंत्रक कार्यालय जबलपुर में 10 हजार रुपये रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़ा गया था। आरोपी ने विश्वकर्मा से रिश्वत लेकर अपने जेब में रख ली थी। इसे पंचसाक्षी ने निकाला। मौके पर आरोपी के हाथ और पेंट की जेब को धुलवाया गया, तो घोल का रंग गुलाबी हो गया था। सुनवाई के दौरान पेश किए गए गवाह व साक्ष्यों को ध्यान में रखते हुए अदालत ने आरोपी को यह दंड सुनाया है।