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Ladli Laxmi Yojna MP: सामाजिक बुराइयों को दिखा रही आइना, बालिकाओं के अधिकारों और हितों की रक्षक भी बनी

Wed, 01 Jun 2022 12:28 PM IST
अंकिता विश्वकर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल

सार

मध्य प्रदेश की लाड़ली लक्ष्मी योजना लगभग डेढ़ दशक से बेटियों के हितों,अधिकारों और सम्मान को सुरक्षा देने का काम कर रही है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की बेटियों के प्रति संवेदनाओं से उपजी योजना समाज में बड़े परिवर्तन लाने कारगर साबित हो रही है।
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सीएम शिवराज सिंह चौहान - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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मध्य प्रदेश सरकार बाल संरक्षण के लिए कार्य कर रही है। प्रदेश सरकार ने कुछ ऐसी योजनाएं संचालित की हैं जो बालिकाओं की जिंदगी को सुरक्षा देते हुए उन्हें समान अवसर भी प्रदान कर रही हैं। मध्य प्रदेश की लाड़ली लक्ष्मी योजना लगभग डेढ़ दशक से बेटियों के हितों,अधिकारों और सम्मान को सुरक्षा देने का काम कर रही है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की बेटियों के प्रति संवेदनाओं से उपजी लाड़ली लक्ष्मी योजना समाज में बड़े परिवर्तन लाने में भी मील का पत्थर साबित हो रही है। 
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लाड़ली लक्ष्मी योजना बेटियों की जिंदगी में खुशियों के रंग भर रही है। बेटियों की पढ़ाई-लिखाई से लेकर विवाह तक की जिम्मेदारी का निर्वहन सरकार उठा रही है। प्रदेश सरकार ने हालही में लाड़ली लक्ष्मी योजना 2.0 का शुभारंभ किया है, जो प्रदेश की बेटियों को विशेषतौर पर उच्च शिक्षा के लिए प्रोत्साहित करने और आत्मनिर्भर बनने में मदद करेगी। 
लाड़ली लक्ष्मी योजना से वर्तमान में 42 लाख से अधिक बेटियों की जिंदगी संवर रही है। इस योजना के जरिए  परिवार, समाज और गांव में लोगों का नजरिया बेटियों के प्रति बदल रहा है। 
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बाल विवाह में 93 प्रतिशत की आई कमी
लाड़ली लक्ष्मी योजना बेटियों के अधिकारों और हितों को संरक्षित कर उन्हें सशक्त और आत्मनिर्भर बना रही हैं। वहीं, ऐसी बेहतरीन योजनाओं ने सामाजिक बुराईयों पर भी कुटाराघात किया है। हालही में 5वें राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण के अनुसार मध्य प्रदेश में बेटा-बेटी की जिंदगी में अभिशाप समान बाल विवाह में करीब 93 प्रतिशत की कमी आई है। इसके साथ ही 2011 की जनगणना के समय प्रदेश का शिशु लिंगानुपात (जन्म के समय) 919 था, जो अब बढ़कर 956 हो चुका है।  ग्वालियर, चंबल और बुंदेलखंड जैसे कम लिंगानुपात वाले क्षेत्रों में लिंगानुपात में सकारात्मक परिवर्तन आया है। इसके साथ ही  2 बच्चों के बाद और अधिक बच्चों की चाह न रखने वाले परिवारों की संख्या 78 प्रतिशत से अधिक हो गई है। 

बेटियों के अधिकारों और हितों का संरक्षण बढ़ा
सुशासन संस्थान के अध्ययन में सामने आए तथ्यों की बात करें तो, बेटी की चाह को लेकर नवविवाहितों एवं किशोर की सोच बेहतर हो रही है। हर वर्ग के 99 प्रतिशत लोग ऐसे हैं जो बेटी का विवाह 18 वर्ष के बाद कराना चाहते हैं। तो वहीं, लगभग 93 प्रतिशत लोग बेटी को 12वीं कक्षा से अधिक पढ़ाना चाहते हैं, ज्यादातर पालक लाड़ली लक्ष्मी योजना का लाभ लेने के लिए बेटी की शिक्षा जारी रखना चाहते हैं। इसके साथ ही 90% से अधिक लोगों की सोच में बालिकाओं के जन्म, स्वास्थ्य, खान-पान संबंधी व्यवहारों, शिक्षा, घर में होने वाले व्यवहार एवं विवाह के संबंध में सकारात्मक परिवर्तन आए हैं।

बेटियां अब बोझ नहीं रहीं 
मध्य प्रदेश में अब बेटी बोझ नहीं रही, बेटी के जन्म पर लोग उत्सव मनाने लगे हैं। बालिका के पालन-पोषण और पढ़ाई-लिखाई की चिंता को लाड़ली लक्ष्मी योजना ने दूर कर दिया है। समाज में बेटियों के अधिकारों को सुरक्षा और अस्तित्व को सम्मान दिलाने में लाड़ली लक्ष्मी  योजना महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभा रही हैं। 

बेटियों के अधिकारों की सुरक्षा और सशक्तिकरण को लेकर प्रदेश सरकार बेहद संजीदा हैं। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में इस दिशा में लगातार सार्थक प्रयास किये जा रहे हैं। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह की सोच के कारण बेटियों का सम्मान भी बढ़ा हैं। यह साधारण बात नहीं है कि बेटियों के अधिकारों और हितों को संरक्षित करने वाली लाड़ली लक्ष्मी योजना आज देश के अन्य राज्यों के लिए भी एक मिसाल  है।
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