भाजपा ने 195 प्रत्याशियों की सूची जारी कर लोकसभा चुनाव अभियान का शंखनाद कर दिया है। खंडवा से मौजूदा सांसद ज्ञानेश्वर पाटिल पर एक बार फिर भाजपा ने विश्वास जताया है। लंबे अरसे से भाजपा का गढ़ खंडवा संसदीय सीट पर पाटिल दूसरी बार किस्मत आजमाएंगे। छह बार के सांसद नंदकुमार सिंह चौहान के निधन से रिक्त हुई सीट पर पाटिल 2021 में उपचुनाव जीते थे।
हालांकि, चुनावों की तैयारियों के मद्देनजर कांग्रेस पिछड़ गई है। खंडवा के पूर्व सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण यादव का नाम कांग्रेस के संभावित उम्मीदवारों में सबसे आगे है। हालांकि, उनके कई समर्थक कांग्रेस का दामन छोड़कर भाजपा की शरण ले चुके हैं। ऐसे में उन्होंने लोकसभा चुनाव लड़ने की इच्छा अब तक जताई नहीं है। विधानसभा चुनाव के समय से ही उनकी नाराजगी और भाजपा में जाने की चर्चाएं भी बनी हुई है।
भाजपा ने चुनाव अभियान शुरू किया
खंडवा लोकसभा सीट पर भाजपा का प्रत्याशी के तौर पर नाम आने के बाद सांसद ज्ञानेश्वर पाटिल ने अपने चुनाव अभियान की शुरुआत कर दी है। टिकट मिलने के बाद खंडवा आगमन पर उनकी पहली रैली ही विवादों में घिर गई थी। डॉ. मोहन यादव सरकार ने पिछले दिनों कोलाहल अधिनियम के तहत दिए गए निर्देशों की धज्जियां उड़ाई गई थी। इसके बाद पुलिस ने डीजे वाहन को ही जब्त कर लिया था।
आठ में से सात विधानसभा सीटों पर काबिज है भाजपा
खंडवा संसदीय सीट में आठ विधानसभा सीटें आती हैं और दिसंबर में आए चुनाव नतीजों में भाजपा ने आठ में से सात पर जीत हासिल की थी। खंडवा जिले की खंडवा, पंधाना और मांधाता विधानसभा सीटों के साथ ही देवास जिले की बागली विधानसभा सीट भी इस संसदीय सीट के दायरे में आती है। इन चारों सीटों पर भाजपा काबिज है। बुरहानपुर जिले की नेपानगर और बुरहानपुर विधानसभा सीटों पर भी भाजपा का कब्जा है। खरगोन जिले की दो विधानसभा सीटों में से बड़वाह सीट पर कांग्रेस को 2023 में हार का सामना करना पड़ा। कांग्रेस से विधायक रहे सचिन बिरला ने भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ा और जीते। भीकनगांव विधानसभा सीट पर कांग्रेस का कब्जा कायम है, जहां झूमा सोलंकी विधायक है।
कुशाभाऊ ठाकरे भी जीत चुके हैं यहां से चुनाव
मध्य प्रदेश भाजपा के पितृ पुरुष माने जाने वाले कुशाभाऊ ठाकरे भी खंडवा सीट से चुनाव लड़ चुके हैं। 1979 के लोकसभा उपचुनावों में जनसंघ के टिकट पर ठाकरे ने जीत हासिल की थी। उन्होंने पूर्व सांसद ठाकुर शिव कुमार सिंह को हराया था। खंडवा संसदीय क्षेत्र के जातिगत समीकरणों में से यहां की चार विधानसभा सीटें बागली, पंधाना, नेपानगर और भीकनगांव आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र हैं। शेष चार विधानसभा क्षेत्रों में क्रमशः गुर्जर, राजपूत, मुस्लिम और ब्राह्मणों का दबदबा है।
20 में से 14 बार मिला बुराहनपुर को प्रतिनिधित्व
खंडवा संसदीय क्षेत्र में आने वाली चार जिलों की सीमाओं के बावजूद यहां से भारतीय जनता पार्टी से लोकसभा का प्रतिनिधित्व बुरहानपुर जिले से आने वाले प्रत्याशियों को मिलता रहा है। इस सीट पर 2024 के चुनावों को मिला दें तो अब तक 20 बार लोकसभा चुनाव और उपचुनाव हुए हैं। 14 बार भाजपा ने बुरहानपुर के नेताओं पर भरोसा जताया है। इसके पहले भी लगातार सात बार बुरहानपुर जिले के ही नंद कुमार सिंह चौहान पर पार्टी ने भरोसा जताया था। चौहान छह बार सांसद रहे हैं। 2009 में उन्हें अरुण यादव ने हराया था और इसके बाद यादव केंद्र में मंत्री भी बने थे।
82 हजार वोटों से उपचुनाव हारी थी कांग्रेस
खंडवा लोकसभा सीट भाजपा के वरिष्ठ नेता और छह बार के भाजपा सांसद नंदकुमार सिंह चौहान के निधन के बाद खाली हुई थी। इस पर 2021 में उपचुनाव हुए थे। ज्ञानेश्वर पाटिल ने कांग्रेस के राजनारायण सिंह को 82000 से अधिक वोटों से हराया था। इसके बाद एक बार फिर 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने ज्ञानेश्वर पाटिल पर ही भरोसा जताया है।
(खंडवा से इस्माइल खान की रिपोर्ट)