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जबलपुर हाईकोर्ट की चिंता: पॉक्सो की 14 हजार से अधिक अपीलें लंबित, कम उम्र के आरोपियों की संख्या पर जताई हैरानी

Wed, 23 Sep 2026 08:25 AM IST
जबलपुर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर

सार

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की तीनों पीठों में पॉक्सो एक्ट की 14,531 आपराधिक अपीलें लंबित हैं। मामले में चीफ जस्टिस अल्पेश वाई. कोगजे और जस्टिस विवेक रूसिया की युगलपीठ ने चिंता जताते हुए पॉक्सो कानून के प्रति व्यापक जागरूकता पर जोर दिया।
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जबलपुर हाईकोर्ट - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
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जबलपुर हाईकोर्ट की तीनों पीठ में पॉक्सो एक्ट के तहत साढ़े 14 हजार से अधिक अपील लंबित होने पर चीफ जस्टिस अल्पेश वाई. कोगजे तथा जस्टिस विवेक रूसिया की युगलपीठ ने चिंता जाहिर की है। युगलपीठ ने पॉक्सो कानून के प्रावधानों के प्रति व्यापक जन-जागरूकता की आवश्यकता पर जोर देते हुए हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार डीई को निगरानी का दायित्व सौंपा है।
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गौरतलब है कि अधिवक्ता अमिताभ गुप्ता की तरफ से दायर याचिका में कहा गया था कि व्यापक प्रचार-प्रसार नहीं होने के कारण पॉक्सो एक्ट के प्रकरणों में बढ़ोतरी हो रही है। एक्ट के तहत केंद्र व राज्य सरकार को एक्ट के संबंध में व्यापक प्रचार-प्रसार करना है, जिससे किशोर और नवयुवकों तक एक्ट के संबंध में जानकारी पहुंच सके। इसके अलावा हाईकोर्ट संज्ञान याचिका के रूप में भी मामले की सुनवाई कर रहा था। इसके अलावा एक अन्य याचिका भी दायर की गई थी।

पॉक्सो और किशोर न्याय कानून को लेकर चलाए गए जागरूकता अभियान
याचिका की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की तरफ से बताया गया कि पॉक्सो और किशोर न्याय कानून के संबंध में विभिन्न स्तरों पर प्रशिक्षण एवं जागरूकता कार्यक्रम चलाए गए हैं। राज्य स्तरीय कार्यक्रम में लगभग 52 हजार लोग शामिल हुए, जबकि विभिन्न जिला स्तरीय कार्यक्रमों में 2,73,701 लोगों को प्रशिक्षण दिया गया। इनमें पुलिसकर्मी, स्कूली विद्यार्थी, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, जिला बाल संरक्षण इकाई के स्वयंसेवक और ग्राम एवं ब्लॉक स्तर के प्रतिभागी शामिल थे। गैर-सरकारी संगठनों के सहयोग से लगातार जागरूकता कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। एक संगठन द्वारा छह जिलों में बाल अधिकार अभियान के माध्यम से लगभग 4.50 लाख लोगों को जागरूक किया गया है। याचिका की सुनवाई करते हुए युगलपीठ ने अपने आदेश में कहा है कि हाईकोर्ट की तीनों पीठों के समक्ष पॉक्सो एक्ट की 14,531 आपराधिक अपीलें लंबित हैं। इनमें से अधिकांश मामलों में पीड़ित की उम्र 16 से 18 वर्ष और आरोपी की उम्र 19 से 22 वर्ष के बीच है। कई आरोपी कम उम्र के हैं और पॉक्सो अधिनियम के तहत अपराध के आरोप में जेल में हैं।
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प्रावधानों के बारे में जागरूकता की कमी
पॉक्सो मामलों में वृद्धि का प्रमुख कारण कानून के प्रावधानों के बारे में जागरूकता की कमी है। कई मामलों में आरोपी और पीड़ित दोनों इस बात से अनजान होते हैं कि दोस्ती या प्रेम संबंध के कारण घर से चले जाने जैसी परिस्थितियां भी पॉक्सो कानून के तहत कानूनी कार्रवाई का कारण बन सकती हैं। युगलपीठ ने अपने आदेश में पॉक्सो अधिनियम की धारा 43 का उल्लेख करते हुए कहा कि केंद्र और राज्य सरकारों का दायित्व है कि कानून के प्रावधानों का टेलीविजन, रेडियो और प्रिंट मीडिया सहित विभिन्न माध्यमों से नियमित रूप से व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए। जागरूकता के लिए किए गए उपायों के बावजूद पॉक्सो अधिनियम के तहत मामले लगातार दर्ज हो रहे हैं। लंबित आपराधिक मामलों और अपीलों का शीघ्र निपटारा तभी प्रभावी ढंग से हो सकेगा, जब नए मामलों की संख्या को कानून के प्रभावी उपायों के जरिए नियंत्रित किया जा सके।

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याचिका पर सुनवाई की जाएगी
युगलपीठ ने हाईकोर्ट रजिस्ट्रार डीई को पीसी एंड पीएनडीटी एक्ट और पॉक्सो एक्ट से संबंधित मामलों की प्रगति तथा अधिनियम के प्रावधानों के क्रियान्वयन की निगरानी का दायित्व सौंपा है। युगलपीठ ने अपने आदेश में कहा है कि कमेटी पॉक्सो मामलों की प्रगति की निगरानी करेगी और मामलों के समयबद्ध निपटारे के लिए आवश्यक निर्देश जारी कर सकेगी। कमेटी को मध्य प्रदेश सरकार के संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश देने का अधिकार भी होगा। युगलपीठ ने अपने आदेश में कहा है कि दो याचिकाओं का निराकरण करते हुए सिर्फ संज्ञान याचिका पर सुनवाई की जाएगी। युगलपीठ ने अधिवक्ता अमिताभ गुप्ता को न्यायालय मित्र नियुक्त किया है।
 
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