सीधी में आदिवासी व्यक्ति पर पेशाब करने वाले भाजपा नेता के खिलाफ एनएसए के तहत कार्यवाही किए जाने को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई है। हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रवि विजय कुमार मलिमठ तथा जस्टिस विशाल मिश्रा की युगलपीठ ने अभय पक्षों के तर्क सुनने के बाद आदेश सुरक्षित रखने के निर्देश जारी किए हैं।
याचिकाकर्ता कंचन शुक्ला की तरफ से दायर की गई याचिका में कहा गया था कि उनका पति प्रवेश शुक्ला एक पार्टी का नेता है। पति द्वारा एक आदिवासी युवक पर पेशाब करने का वीडियो वायरल होने के बाद इसे राजनीतिक मुद्दा बना लिया गया। प्रशासन द्वारा भी उसके खिलाफ एनएसए के तहत कार्यवाही की गई है। याचिका में एनएसए कार्यवाही की वैधता को चुनौती दी गई थी। याचिकाकर्ता की तरफ से तर्क दिया गया कि उसका कोई अपराधिक रिकॉर्ड नहीं है। मामले को राजनीतिक मुद्दे का रूप दिया गया था, जिसके कारण प्रशासन ने आरोपी के खिलाफ एनएसए की कार्यवाही की है। एनएसए की कार्यवाही अनुच्छेद-21 का उल्लंघन है।
सरकार की तरफ से युगलपीठ को बताया गया था कि पब्लिक आर्डर के तहत आरोपी के खिलाफ कार्यवाही की गई है। इस संबंध में सर्वाेच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश का हवाला भी दिया गया था। राज्य सरकार द्वारा भी एनएसआई की कार्यवाही पर सहमत्ति प्रदान कर दी गई है। याचिकाकर्ता की तरफ से बताया गया कि वायरल वीडियो साल 2020 का है। तीन साल बाद वीडियो के आधार पर एनएसए की कार्यवाही करना अवैधानिक है।
किसी प्रकार के दंगे या विवाद की कोई स्थिति निर्मित नहीं हुई थी। सीएम द्वारा सोशल मीडिया में की गई पोस्ट का हवाला देते हुए कहा गया कि यह पब्लिग ऑर्डर के तहत नहीं सीएम ऑर्डर के तहत कार्यवाही की गई है। युगलपीठ ने सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रखने के आदेश जारी किये हैं। याचिकाकर्ता की तरफ से अधिवक्ता अनिरूध्द मिश्रा ने पैरवी की।