मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने स्टेट बार काउंसिल द्वारा पूर्व में जारी नोटिस का जवाब न दिए जाने पर गंभीर रुख अपनाया है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा और न्यायमूर्ति विनय सराफ की युगलपीठ ने स्टेट बार काउंसिल की सचिव गीता शुक्ला को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में उपस्थित होकर स्पष्टीकरण देने का निर्देश दिया है। इस मामले की अगली सुनवाई 12 सितंबर को होगी।
यह मामला अधिवक्ता ग्रीष्म जैन और रश्मि रितु जैन की ओर से दायर याचिका से जुड़ा है। इसमें स्टेट बार सदस्य जगन्नाथ त्रिपाठी को मनमाने तरीके से चेंबर आवंटित किए जाने के फैसले को चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता सतीश वर्मा ने तर्क दिया कि हाईकोर्ट ने प्रारंभिक सुनवाई के दौरान ही स्टेट बार काउंसिल के सदस्य जगन्नाथ त्रिपाठी के चेंबर आवंटन पर रोक लगा दी थी। इसके साथ ही स्टेट बार काउंसिल के चेयरमैन और अन्य सदस्यों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया था।
हालांकि, स्टेट बार सचिव गीता शुक्ला को नोटिस मिलने के बावजूद अब तक कोई जवाब प्रस्तुत नहीं किया गया। याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि वरिष्ठता सूची को दरकिनार करते हुए कम पात्रता वाले अधिवक्ताओं को चेंबर आवंटित किए गए हैं। कई अधिक पात्र अधिवक्ताओं के आवेदन अभी भी लंबित हैं। इसके अलावा आरोप है कि दिवंगत अधिवक्ताओं, नियमित रूप से वकालत न करने वाले वकीलों और उनके रिश्तेदारों तक को अनियमित रूप से चेंबर आवंटित किया गया है। जवाब दाखिल न होने पर न्यायालय ने स्टेट बार काउंसिल की सचिव को व्यक्तिगत रूप से हाजिर होकर स्पष्टीकरण देने का आदेश दिया है।