मध्य प्रदेश में ओबीसी आरक्षण 27 प्रतिशत किए जाने के संबंध में दायर 64 याचिकाओं की सुनवाई हाईकोर्ट जस्टिस शील नागू तथा जस्टिस वीरेंन्द्र सिंह की युगलपीठ द्वारा की गई। सुनवाई के दौरान आरक्षण के विरोध में तर्क प्रस्तुत करते हुए कहा गया है जनसंख्या के आधार पर आरक्षण का लाभ नहीं दिया जा सकता है। युगलपीठ ने याचिका पर मंगलवार 23 अगस्त को सुनवाई जारी रखने के निर्देश दिए हैं।
गौरतलब है कि आशिता दुबे सहित अन्य की तरफ से प्रदेश सरकार द्वारा ओबीसी आरक्षण 27 प्रतिशत किए जाने के खिलाफ तथा पक्ष में लगभग 60 से अधिक याचिकाएं दायर की गई थीं। हाईकोर्ट ने कई लंबित याचिकाओं पर ओबीसी आरक्षण 27 प्रतिशत दिए जाने पर रोक लगा दी थी। सरकार द्वारा स्थगन आदेश वापस लेने के लिए आवेदन दायर किया गया था। हाईकोर्ट ने 1 सितंबर 2021 को स्थगन आदेश वापस लेने से इंकार करते हुए संबंधित याचिकाओं को अंतिम सुनवाई के निर्देश जारी किये थे।
प्रदेश सरकार के सामान्य प्रशासन विभाग ने महाधिवक्ता द्वारा 25 अगस्त 2021 को दिए अभिमत के आधार पर पीजी नीट 2019-20, पीएससी के माध्यम से होने वाली मेडिकल अधिकारियों की नियुक्ति तथा शिक्षक भर्ती छोड़कर अन्य विभाग में 27 ओबीसी वर्ग को 27 प्रतिशत दिए जाने के आदेश जारी कर दिए। उक्त आदेश के खिलाफ भी हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थीं।
ओबीसी आरक्षण 27 प्रतिशत किए जाने के खिलाफ अधिवक्ता आदित्य संघी ने तर्क प्रस्तुत किया कि सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक पीठ ने साल 1993 में इंदिरा साहनी तथा साल 2021 में मराठा आरक्षण के मामले में स्पष्ट आदेश दिए हैं कि आरक्षण की सीमा 50 प्रतिशत से अधिक नहीं होना चाहिए। प्रदेश में ओबीसी आरक्षण 27 प्रतिशत किए जाने पर आरक्षण की सीमा 63 प्रतिशत तक पहुंच जाएगी। ईडब्ल्यूएस वर्ग को मिलने वाला 10 प्रतिशत आरक्षण जोड़ दिया जाए तो कुल आरक्षण का प्रतिशत 73 हो जाएगा।
सरकार की तरफ से प्रस्तुत जवाब में कहा गया कि साल 2011 की जगगणना के अनुसार प्रदेश में ओबीसी वर्ग की संख्या लगभग 51 प्रतिशत है। जनसंख्या के आधार पर ओबीसी वर्ग को 27 प्रतिशत आरक्षण प्रदान किया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने मराठा आरक्षण के मामले में स्पष्ट रूप से कहा है जनसंख्या के आधार पर आरक्षण नहीं दे सकते हैं। महाराष्ट में मराठा ओबीसी का प्रतिशत 83 है। न्यायालीन समय पूरा होने के कारण युगलपीठ ने याचिकाओं पर सुनवाई मंगलवार को जारी रखने के निर्देश दिए हैं। सरकार की तरफ से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एम नटराजन वीडियों कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से उपस्थित हुए।