मध्य प्रदेश हाईकोर्ट (फाइल फोटो)
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पुलवामा हमले में शहीद हुए सीआरपीएफ जवान अश्विनी काछी के परिवार से किया गया वादा पांच साल बाद भी सरकार पूरा नहीं कर की। इस संबंध में प्रकाशित खबर को संज्ञान में लेते हुए हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई जनहित याचिका के रूप में करने के निर्देश दिए थे। हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रवि विजय कुमार मलिमथ तथा जस्टिस विशाल मिश्रा की युगलपीठ ने याचिका की सुनवाई करते हुए मुख्य सचिव को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। याचिका पर सुनवाई अगले सप्ताह निर्धारित की गई है।
बता दें कि अमर उजाला ने उक्त खबर को प्राथमिकता से प्रकाशित किया था। खबर में कहा गया था कि पुलवामा आतंकी हमले शहीद हुए जवान अश्विनी काछी को शासन व प्रशासन ने भूला दिया। पुलवामा हमले की पांचवीं बरसी पर बुधवार 14 शहीद की प्रतिमा में माल्यार्पण करने परिजनों के साथ सेना के अधिकारी तथा गांव के लोग ही पहुंचे। परिजनों ने शहीदों के याद में कन्या भोज का आयोजन किया। जिला प्रशासन तथा जनप्रतिनिधियों में कोई नहीं पहुंचा था। शहीद में भाई सुमंत काछी तथा भतीजी प्रियंका काछी ने बताया कि अश्विन की प्रतिमा की स्थापना उनके परिवार ने अपने व्यय से करवाई थी। प्रतिमा के निर्माण में साढ़े 6 लाख रुपये व्यय हुए थे। अंतिम संस्कार व प्रतिमा अनावरण में समय प्रशासनिक अधिकारियों व जनप्रतिनिधियों ने शहीद के नाम पर स्कूल तथा प्रतिमा स्थल में पार्क बनाने की घोषणा की थी, जो अभी तक पूरी नहीं हुई। शहादत दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में कोई प्रशासनिक अधिकारी व जनप्रतिनिधि शिरकत करने नहीं आए। सेना के अधिकारी तथा सेवानिवृत्त सैनिक व ग्रामीण जनों ने कार्यक्रम में शिरकत कर शहीद की प्रतिमा में श्रद्धा सुमन अर्पित किए थे।
भतीजी प्रियंका कहना था कि जनप्रतिनिधियों तथा प्रशासनिक अधिकारियों से पार्क निर्माण या स्कूल के नामांकरण की बात करते है तो वह कहते है कि एक करोड़ रुपये तो मिल गए हैं। किसी जवान की शहादत का मूल्यांकन रुपये से नहीं करना चाहिए। जवानों की शहादत को चुनाव में मुद्दा बनाया जाता है परंतु शहादत दिवस पर श्रद्धा सुमन अर्पित करने भी कोई नहीं आता है। सरकार द्वारा जो परिजनों को आवास दिया गया है, उसकी दशा भी दयनीय है। सरकार तथा प्रशासन की तरफ से जो वादा किया गया था, उसे पूरा नहीं किया गया।