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MP News: शराब के नशे में अधिवक्ता ने न्यायालय परिसर में की जज से अभद्रता, हाईकोर्ट ने दी 15 दिन कारावास की सजा

Tue, 23 May 2023 07:16 PM IST
दिनेश शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर

सार

छिंदवाड़ा जिला कोर्ट में अधिवक्ता सुदामा बघेल ने 18 जनवरी 2020 को शराब के नशे में गाली-गलौज व सीटी बजाते हुए हंगामा किया। जेएफएफसी प्रदीप कुमार सोनी से अभद्रता की। हाईकोर्ट ने 15 दिन कारावास की सजा सुनाई है।
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मध्य प्रदेश हाईकोर्ट (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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शराब के नशे में न्यायालय परिसर में हंगामा करते तथा जेएफएफसी के साथ अभद्रता करते हुए हमला करने के लिए उनकी तरफ दौड़ने वाले अधिवक्ता को हाईकोर्ट ने अपराधिक अवमानना को दोषी पाया है। हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रवि विजय कुमार मलिमथ तथा जस्टिस विशाल ने दोषी अधिवक्ता को 15 दिन के कारावास तथा दो हजार रुपये के अर्थदंड की सजा से दंडित किया है।
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बता दें कि छिंदवाड़ा जिला कोर्ट में अधिवक्ता सुदामा बघेल ने 18 जनवरी 2020 को शराब के नशे में गाली-गलौज व सीटी बजाते हुए हंगामा किया। अवकाश दिवस होने के कारण रिमांड ड्यूटी में उपस्थित होने के लिए जेएफएफसी प्रदीप कुमार सोनी परिसर से होते हुए न्यायालय जा रहे थे। इस दौरान शराबी अधिवक्ता ने असभ्यतापूर्ण तरीके से चिल्लाकर उन्हें रोका। मना करने पर शराबी अधिवक्ता हमला करने उनकी तरफ दौड़ा। उनका रास्ता रोककर धमकी दी कि मैं आपके खिलाफ उच्च न्यायालय के लिए लिफाफा तैयार कर रहा हूं।

कोर्ट रूम पहुंचने पर जेएफएफसी ने प्रकरण की सुनवाई प्रारंभ की तो शराबी अधिवक्ता ने कक्ष से पीछे पहुंचकर चिल्लाते हुए धमकी देने का क्रम जारी रखा और सीटी बजाता रहा। जिसके कारण न्यायिक कामकाज बाधित रहा। शराबी अधिवक्ता के इस कृत्य से अन्य न्यायालयों का भी कामकाज प्रभावित रहा। जिला व सत्र न्यायाधीश के निर्देश पर शराबी अधिवक्ता के खिलाफ पुलिस कार्रवाई की गई।
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पहले भी कर चुका ऐसी ही हरकत
इस घटना के पूर्व भी अधिवक्ता ने 22 नवम्बर 2019 को शराब के नशे में धुत होकर न्यायालय परिसर में गाली-गलौज हंगामा किया था। सीजेएफ के आवेदन पर पुलिस ने उसके खिलाफ विभिन्न धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज किया था। हाईकोर्ट ने घटना को संज्ञान में लेते हुए प्रारंभिक तौर पर अपराधिक अवमानना को दोषी पाया था। हाईकोर्ट ने अधिवक्ता के खिलाफ अपराधिक अवमानना की सुनवाई के निर्देश दिए थे। संज्ञान याचिका पर सुनवाई के बाद युगलपीठ ने अधिवक्ता को अपराधिक अवमानना को दोषी पाते हुए उक्त सजा से दंडित किया।
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