लोकायुक्त ने महिला एवं बाल विकास विभाग में पदस्थ परियोजना अधिकारी सहित तीन सुपरवाइजर को रिश्वत लेते हुए रंगेहाथ पकड़ा। आरोपी महिला कर्मचारियों ने आंगनवाड़ी सहायिका के पद पर चयनित उम्मीदवार से जॉइनिंग लेटर के एवज में पचास हजार रुपये इनाम के तौर पर मांगे थे। लोकायुक्त ने सभी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज कर आवश्यक कार्रवाई की।
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लोकायुक्त पुलिस अधीक्षक जबलपुर अंजू लता पटले के अनुसार पूजा उइके का महिला एवं बाल विकास विभाग में ग्राम उमरघोड में वरीयता के आधार पर आंगनवाड़ी सहायिका के पद पर चयन हुआ था। जॉइनिंग लेटर देने के बाद परियोजना अधिकारी जुन्नारदेव सीमा पटेल (40) ने सुपरवाइजर लक्ष्मी पंडोल तथा बिंदु माहोरे के माध्यम से इनाम के रूप में 50 हजार की मांग कर रही थी। इसकी शिकायत पीड़ित द्वारा लोकायुक्त में की गई थी। शिकायत का सत्यापन करने पर सही पाई गई थी।
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पीड़ित रिश्वत की पहली किस्त 20 हजार रुपये लेकर परियोजना अधिकारी जुन्नारदेव के कार्यालय पहुंची। पीड़िता को रिश्वत की राशि सुपरवाइजर आरती आम्रवंशी को देने के लिए कहा गया। आरती ने जैसे ही रिश्वत की रकम लेकर अपने पास रखी तभी लोकायुक्त की टीम ने दबिश देकर उसे रंगे हाथ पकड़ लिया। लोकायुक्त की टीम ने चारों महिला कर्मचारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 तथा 13 के तहत प्रकरण दर्ज कर आवश्यक कार्रवाई की। लोकायुक्त के ट्रेप दल में निरीक्षक उमा कुशवाहा,निरीक्षक शशि मुस्कले, निरीक्षक जितेन्द्र यादव सहित अन्य शामिल थे।