रावण की पूजा करते लंकेश।
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49 साल से कर रहे रावण की भक्ति
संतोष नामदेव उर्फ लंकेश पिछले 49 साल से रावण की भक्ति कर रहे हैं। वे नवरात्रि की पंचमी तिथि पर रावण की प्रतिमा स्थापित करते हैं। इस दौरान सुबह-शाम रावण की उपासना करते हैं। दशहरे पर रावण की प्रतिका का विसर्जन किया जाता है। इसके लिए धूमधाम से शोभायात्रा निकाली जाती है, जिसमें गांव के सैकड़ों लोग शामिल होते हैं। लंकेश रावण को अपना गुरु और इष्ट देव मानते हैं।
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राक्षस कुल को तारने के लिए रावण ने सब किया
रावण की अराधना करने को लेकर लंकेश का कहना है कि लंका के राजा रावण में भले की बुराई थी, लेकिन मैं उनकी अच्छाइयों को आगे बढ़ा रहा हूं। रावण बहुत ज्ञान था और वह विद्वान थे, उनमें कोई अवगुण नहीं थे। मैंन 49 साल से रावण की आराधना कर रहा हूं, मुझे जो भी मिला है उनकी भक्ति से ही मिला है, मेरी हर मनोकामना पूरी हुई है। लंकाधिपति रावण ने जो किया वह अपने राक्षस कुल को तारने के लिए किया था। उन्होंने माता सीता का अपहरण किया, लेकिन उन्हें उस अशोक वाटिका में रखा, जहां नर और राक्षस ही नही पशु-पक्षी को भी जाने की अनुमति नहीं थी।
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