एमबीबीएस कोर्स पूर्ण करने के छह महीने बावजूद भी सरकार द्वारा पदस्थापना या एनओसी दिए जाने की मांग करते हुए करते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी। याचिका में कहा गया था कि सरकार ने अनुबंध किया था कि एमबीबीएस कोर्स पूर्ण करने के बाद उन्हें एक साल तक ग्रामीण क्षेत्रों में सेवाएं देनी होगी। हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रवि विजय कुमार मलिमठ तथा जस्टिस विशाल मिश्रा की युगलपीठ ने अनावेदकों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
याचिकाकर्ता डॉक्टर सिध्दार्थ कसाना, डॉ सोनाली अग्रवाल सहित अन्य पांच की तरफ से दायर की गई याचिका में कहा गया था कि उन्होंने साल 2017 में एमबीबीएस कोर्स में दाखिला लिया था। उनका कोर्स मार्च 2022 में पूर्ण हो गया था। इसके बाद उन्होंने एक साल तक इंटर्नशिप का कार्यकाल पूर्ण किया। दाखिला लेते हुए सरकार ने एक अनुबंध किया था कि कोर्स पूर्ण होने के बाद वह प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में एक साल तक सेवाएं प्रदान करेंगे।
याचिकाकर्ता की तरफ से पैरवी करते हुए अधिवक्ता आदित्य संघी ने युगलपीठ को बताया कि सभी याचिकाकर्ता दूसरे प्रदेश के निवासी हैं। कोर्स और इंटर्नशिप पूर्ण किए छह महीने से अधिक का समय हो गया है। परंतु सरकार द्वारा ग्रामीण क्षेत्र में उन्हें पदस्थ नहीं किया गया है। सरकार उन्हें एनओसी भी प्रदान नहीं कर रही है। उनके प्रदेश में डॉक्टरों की सीट रिक्त है। कोर्स पूर्ण करने के बावजूद भी याचिकाकर्ता विगत छह महीने से सिर्फ समय काट रहे हैं। याचिका में प्रमुख सचिव तथा संचालक मेडिकल एजुकेशन तथा संचालक स्वास्थ सेवा को अनावेदक बनाया गया था। युगलपीठ ने अनावेदकों को नोटिस जारी कर अगली सुनवाई अक्टूबर महीने के पहले सप्ताह में निर्धारित की है।