प्राचार्य के खिलाफ लगाए गए आरोप सही पाए गए हैं
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मध्य प्रदेश के जबलपुर में प्राचार्य दोस्त की शिकायत करने पर जिला शिक्षा अधिकारी ने महिला उप प्राचार्य का स्थानांतरण कर दिया। इसको चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी। याचिका की सुनवाई के दौरान जस्टिस विशाल धगट की एकलपीठ ने पाया कि जांच में प्राचार्य के खिलाफ लगाए गए आरोप सही पाए गए हैं। एकलपीठ ने महिला प्राचार्य को राहत प्रदान करने हुए वापस उसी स्कूल में पदस्थ करने के आदेश जारी किए हैं।
जानकारी के मुताबिक, याचिकाकर्ता श्रद्धा शुक्ला सीएम राइज स्कूल बरेला में उप प्राचार्य के पद पर पदस्थ थीं। उन्होंने प्राचार्य डीके गुप्ता द्वारा बदसलूकी करने की शिकायत की थी। शिकायत पर जिला शिक्षा अधिकारी घनश्याम सोनी ने जांच शुरू की थी। जिला शिक्षा अधिकारी और प्राचार्य की दोस्ती का हवाला देते हुए महिला उप प्राचार्य ने स्वतंत्र जांच की मांग करते हुए लिए शासन को लिखित आवेदन दिया था।
उसके बाद ज्वाइंट डायरेक्टर ने जांच शुरू की थी। ज्वाइंट डायरेक्टर अपनी जांच रिपोर्ट पेश करते, इसके पहले जिला शिक्षा अधिकारी ने अपनी जांच पूरी करते हुए उनके स्थानांतरण की संस्तुति कर दी। उनका स्थानांतरण दो जनवरी को शिक्षक के पद पर उमरिया कर दिया गया। याचिकाकर्ता की ओर से तर्क दिया गया कि जांच लंबित होने के दौरान स्थानांतरण करने से पूर्व सुनवाई का अवसर प्रदान किया जाना चाहिए था।
याचिका की सुनवाई के दौरान सरकार की तरफ से तर्क दिया गया कि स्थानांतरण याचिकाकर्ता के अनुरोध पर किया गया है। इस दौरान ज्वाइंट डायरेक्टर की जांच रिपोर्ट में याचिकर्ता के आरोप को सही पाते हुए प्राचार्य को बदसलूकी करने का दोषी पाया गया। याचिका की सुनवाई के बाद एकलपीठ ने याचिकर्ता महिला को बरेला स्कूल में पदस्थ करने के आदेश जारी किए हैं। एकलपीठ ने जिला शिक्षा अधिकारी से स्पष्टीकरण मांगा है कि ज्वाइंट डायरेक्टर जांच कर रहे तो उनके द्वारा जांच किस आधार पर की गई। याचिकाकर्ता की तरफ से अधिवक्ता पंकज दुबे और रितिका गुप्ता ने पैरवी की।