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MP हाईकोर्ट का अहम आदेश: अनुकंपा नियुक्ति पर पत्नी का भी हक, मां को मिले बीमा-ग्रेच्युटी राशि का आधा हिस्सा

Mon, 08 Apr 2024 10:04 PM IST
दिनेश शर्मा अमर उजाला, न्यूज डेस्क, जबलपुर

सार

शहडोल निवासी निर्मला पांडे तथा उसकी सास कमला पांडे तथा देवर की तरफ से दो अलग-अलग याचिका दायर की गई थी। हाईकोर्ट ने अपने अहम आदेश में कहा है कि अनुकंपा नियुक्ति पर वैवाहिक पत्नी का हक है। जस्टिस विवेक जैन ने मृतक कर्मचारी के ग्रेच्युटी व बीमा राशि से 50 प्रतिशत राशि मां को देने के आदेश जारी किए हैं। 
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मध्य प्रदेश हाईकोर्ट (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला
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मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने अपने अहम आदेश में कहा है कि अनुकंपा नियुक्ति पर वैवाहिक पत्नी का हक है। जस्टिस विवेक जैन ने मृतक कर्मचारी के ग्रेच्युटी व बीमा राशि से 50 प्रतिशत राशि मां को देने के आदेश जारी किए हैं। एकलपीठ ने उक्त आदेश के साथ याचिकाओं का निराकरण कर दिया।
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शहडोल निवासी निर्मला पांडे तथा उसकी सास कमला पांडे तथा देवर की तरफ से दो अलग-अलग याचिका दायर की गई थी। याचिकाकर्ता निर्मला पांडे की तरफ से दायर की गई याचिका में कहा गया था कि उसका विवाद दिसंबर 2020 में जितेन्द्र पांडे से हुआ था। उसके पति पुलिस विभाग में आरक्षक के पद पर पदस्थ थे। जिनकी मृत्यु सड़क दुर्घटना में जुलाई 2021 में हो गई थी। इसके बाद उसने अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन किया था। कलेक्टर ने भी अनुकंपा नियुक्ति के लिए उसके पक्ष में सर्टिफिकेट जारी कर दिया था। उसे पुलिस विभाग में अनुकंपा नियुक्ति प्रदान कर दी गई थी। पति के सर्विस रिकॉर्ड में नॉमिनी के रूप में मां तथा भाई का नाम दर्ज होने के कारण जिला कलेक्टर ने जारी सर्टिफिकेट निरस्त कर दिया था। जिसके कारण उसे नौकरी से हटा दिया गया था।

सास कमला बाई तथा देवर की तरफ से दायर की गई याचिका में कहा गया था कि उसके पति पुलिस विभाग में पदस्थ थे, जिनकी मौत साल 2007 में हो गई थी। जिसके बाद उसके बेटे जितेन्द्र को 2011 में अनुकंपा नियुक्ति मिली थी। बेटे की मौत के बाद बहू को अनुकंपा नियुक्ति प्रदान कर दी गई। इसके लिए परिजनों की सहमति नहीं ली गई थी। दोनों याचिकाओं का निराकरण करते हुए एकलपीठ ने अपने आदेश में कहा कि मां तथा पत्नी ही परिवार की सदस्य हैं। एकलपीठ ने उक्त आदेश के साथ दोनों याचिकाओं का निराकरण कर दिया।
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