मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय, जबलपुर
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न्यू लाइफ मल्टी स्पेशियलिटी हॉस्पिटल में हुए अग्निकांड ने आठ लोगों की जान ले ली थी, और ये अस्पताल के नियम विरुद्ध संचालित हो रहा था। इसे लेकर हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी। चीफ जस्टिस सुरेश कैत और जस्टिस विवेक जैन की युगलपीठ ने इस हादसे की जांच के लिए संभागायुक्त की अध्यक्षता में गठित कमेटी की रिपोर्ट पुलिस को सौंपने का निर्देश दिया है। साथ ही जबलपुर में नियम विरुद्ध संचालित अस्पतालों पर की गई कार्रवाई की रिपोर्ट प्रस्तुत करने के भी आदेश दिए हैं।
बता दें कि लॉ स्टूडेंट एसोसिएशन के अध्यक्ष विशाल बघेल व अन्य ने याचिका दायर कर बताया कि जबलपुर में कई निजी अस्पताल बिना आवश्यक मापदंडों को पूरा किए संचालित हो रहे हैं। न्यू लाइफ अस्पताल को भी नियमों की अनदेखी कर पंजीयन दिया गया था। अस्पताल में आपातकालीन निकास नहीं था, जिससे मरीज और स्टाफ आग लगने पर बाहर नहीं निकल सके और दम घुटने से उनकी मौत हो गई।
याचिका में यह भी बताया गया कि कोरोना काल में जबलपुर में 65 निजी अस्पतालों को संचालन की अनुमति दी गई, जिनमें से कई अस्पतालों ने फायर सेफ्टी, नेशनल बिल्डिंग कोड और अन्य नियमों का पालन नहीं किया। कई अस्पतालों को बिना भौतिक निरीक्षण के अनुमति दी गई, जिससे मरीजों की सुरक्षा खतरे में पड़ी।
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हाईकोर्ट के निर्देश
पूर्व में हुई सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने बताया कि नियम विरुद्ध अस्पतालों के खिलाफ कार्रवाई जारी है और कोठारी व एप्पल अस्पताल का पंजीयन निरस्त कर दिया गया है। याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया कि संभागायुक्त की अध्यक्षता में गठित हाई-लेवल जांच कमेटी की रिपोर्ट पहले ही न्यायालय में पेश की जा चुकी है। इस रिपोर्ट में अस्पताल के पंजीयन हेतु भौतिक निरीक्षण करने वाले डॉक्टर एल.एन. पटेल और डॉक्टर निशेष चौधरी को दोषी ठहराया गया, फिर भी उन्हें आरोपी नहीं बनाया गया।
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याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि अगर इन डॉक्टरों ने सही भौतिक निरीक्षण रिपोर्ट दी होती तो अस्पताल को पंजीयन नहीं मिलता। रिपोर्ट के आधार पर ही अस्पताल को अनुमति दी गई, जबकि वहां आपातकालीन दरवाजा तक नहीं था, जिससे हादसे में आठ लोगों की मौत हो गई। याचिका पर सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने अस्पताल अग्निकांड की जांच रिपोर्ट पुलिस को सौंपने और नियम विरुद्ध अस्पतालों पर की गई कार्रवाई की रिपोर्ट प्रस्तुत करने के आदेश दिए। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता आलोक बागरेचा ने पैरवी की।