दुष्कर्म के प्रकरण दर्ज एफआईआर को निरस्त किए जाने की मांग करते हुए मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी। याचिकाकर्ता की तरफ से याचिका की सुनवाई के दौरान सिविल सर्विस उत्तीर्ण किए जाने के दस्तावेज प्रस्तुत किए गए। पीड़ित की तरफ से आपत्ति पेश करने हुए उन फर्जी दस्तावेजों को फर्जी बताया गया। जस्टिस विशाल धगट की एकलपीठ ने दस्तावेजों की जांच करने राज्य सरकार को निर्देश जारी किए हैं।
नरसिंहपुर निवासी वीर सिंह राजपूत की तरफ से दायर की गई याचिका में कहा गया था कि अनावेदिका ने महिला थाने में उसके खिलाफ दुष्कर्म की एफआईआर दर्ज की गई है। याचिका में राहत चाही गई कि थी उक्त एफआईआर को निरस्त किया जाए। याचिका की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की तरफ से सिविल सेवा एग्जाम उत्तीर्ण करने के दस्तावेज प्रस्तुत करते हुए कहा कि प्रकरण के उसका भविष्य खराब हो जाएगा।
पीड़ित की तरफ से अधिवक्ता मोहम्मद अली व अभिमन्यु सिंह ने आपत्ति पेश करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता की सिविल सेवा सर्विस उत्तीर्ण होने के फर्जी दस्तावेज किए हैं। न्यायालय की सहानुभूति पाने याचिकाकर्ता की तरफ से ऐसा किया गया है। याचिकाकर्ता की तरफ से पेश किए गए दस्तावेज के अनुसार सिविल सेवा सर्विस में उसका चयन साल 2019 में आईएएस के रूप में हुआ है। वर्तमान में वह प्रोविजन नियुक्ति पर है। उसका तबादला जम्मू-कश्मीर से मध्यप्रदेश हुआ है।
इसके साथ ही आईपीएस के रूप में नियुक्ति का दावा किया गया है। पिछले दो वर्षों की सूची में वीर सिंह राजपूत नाम का कोई अधिकारी चयनित नहीं हुआ है। याचिका की सुनवाई के बाद युगलपीठ ने सरकार को दस्तावेज के जांच के निर्देश दिए हैं। एकलपीठ ने 15 दिनों में जांच पूरी कर रिपोर्ट हाईकोर्ट के समक्ष प्रस्तुत करने निर्देश भी जारी किए हैं।