रीवा में खनन गतिविधियों के कारण होने वाले प्रदूषण और पर्यावरणीय नुकसान को लेकर राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) में जनहित याचिका दायर की गई है। मामले पर प्रारंभिक सुनवाई के बाद जस्टिस शिव कुमार सिंह व एक्सपर्ट मेंबर डॉ. अफरोज अहमद की युगलपीठ ने मुख्य सचिव, पर्यावरण एवं वन विभाग के प्रमुख सचिव, केंद्रीय एवं राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल, कलेक्टर और अन्य को नोटिस जारी कर जवाब पेश करने के निर्देश दिए हैं। रीवा निवासी अनूप सिंह की ओर से अधिवक्ता अमित सिंह सेंगर ने पक्ष रखा। उन्होंने बताया कि अल्ट्राटेक कंपनी के प्रोजेक्ट संचालन के लिए करीब 600 एकड़ क्षेत्र में खनन का काम किया जा रहा है।
ये भी पढ़ें:
शादी के 18 साल बाद चार बच्चों की मां आधी रात प्रेमी के साथ फरार, बच्चे कर रहे इंतजार, जानें मामला
याचिका में उठाए गए मुख्य मुद्दे
- ग्रीन बेल्ट का अभाव: नियमानुसार 33% क्षेत्र ग्रीन बेल्ट एरिया के रूप में विकसित किया जाना चाहिए, जोकि नहीं किया गया।
- डस्ट कंट्रोल का अभाव: स्प्रिंकल से छिड़काव नहीं किया जाता, जिससे आसपास के मकान, स्कूल, कृषि क्षेत्र और जलस्रोत प्रभावित हो रहे हैं।
- भूजल प्रदूषण: खनन के कारण भूजल प्रदूषित हो चुका है।
- पर्यावरणीय पुनर्स्थापन निधि का दुरुपयोग: नियमानुसार कुल लाभ का कुछ प्रतिशत पर्यावरणीय पुनर्स्थापन (Environmental Restoration) के लिए खर्च किया जाना चाहिए, जिसमें स्कूल, स्वास्थ्य, मेडिकल सुविधाएं, जल शोधन, डस्ट कंट्रोल आदि शामिल हैं, लेकिन ऐसा नहीं किया जा रहा।
- नए प्रोजेक्ट की योजना: कंपनी द्वारा नया प्रोजेक्ट भी लाया जा रहा है, जिससे पर्यावरणीय नुकसान बढ़ने की आशंका है।
ये भी पढ़ें: मंत्री प्रतिमा बागरी पर कांग्रेस का बड़ा आरोप, अनुसूचित जाति वर्ग के प्रमाण पत्र को फर्जी बताया
याचिका में की गई मांग
पर्यावरणीय नुकसान का आकलन करने के लिए एक्सपर्ट कमेटी का गठन किया जाए। सुनवाई के बाद न्यायालय ने संबंधित विभागों को नोटिस जारी कर जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
ये वीडिया भी देखिए...