इंदौर निवासी थर्ड जेंडर नूरी की तरफ से दायर की गई याचिका में कहा गया था कि सरकारी फॉर्म में विकल्प नहीं होने के कारण थर्ड जेंडर को कोई कार्ड जारी नहीं किया जाता है। कोरोना संक्रमण काल में राशन कार्ड नहीं होने के कारण थर्ड जेंडर को पीडीएस योजना के तहत राशन भी नहीं मिला। इसके अलावा उन्हें अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ भी नहीं मिला। याचिका में कहा गया था कि थर्ड जेंडर के दो श्रेणी के होते हैं, एक जो बधाई मांगते हैं और दूसरे जो काम कर अपना जीवन ज्ञापन करते हैं। बधाई मांगने वाले को आर्थिक परेशानी नहीं रहती है, परंतु जो लोग काम कर अपना जीवन ज्ञापन करते हैं उन्हें कई तरह की परेशानी का सामना करना पड़ता है। थर्ड जेंडर होने के कारण परिवार उनका त्याग कर देता है और उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ भी नहीं मिलता है। इस संबंध में पूर्व में दायर याचिका का निराकरण करते हुए संबंधित अधिकारियों के समक्ष अभ्यावेदन पेश करने के निर्देश दिए थे। अभ्यावेदन पेश करने के बावजूद भी किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं किए जाने के कारण उक्त याचिका दायर की गई है।
याचिका पर हुई सुनवाई के दौरान सरकार की तरफ से बताया गया था कि थर्ड जेंडर को नेशनल फूड सिक्योरिटी एक्ट के तहत राशन प्रदान किया जाएगा। हाईकोर्ट ने याचिका में उठाए गए मुददों को गंभीरता से लेते हुए अपने आदेश में कहा था कि मध्य प्रदेश विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव अपने मार्गदर्शन में पैरालीगल वॉलेन्टियर की मदद से पूरे प्रदेश में थर्ड जेंडर को चिन्हित करने का कार्य करवाएं। इसके बाद उन्हें पहचान-पत्र तथा राशन कार्ड बनवाने का कार्य करवाएं। युगलपीठ ने प्रदेश के सभी कलेक्टरों को निर्देशित किया गया है कि थर्ड जेंडर को खाद्य सामग्री उपलब्ध करवाई जाए। इसके अलावा उन्हें केन्द्र व राज्य सरकार की योजनओं का लाभ भी प्रदान किया जाए। युगलपीठ ने आदेश की प्रति अतिरिक्त मुख्य सचिव सामाजिक न्याय तथा कल्याण विभाग तथा सचिव विधिक सेचा प्राधिकरण को भेजने के निर्देश दिए हैं।
याचिका पर बुधवार को हुई सुनवाई के दौरान युगलपीठ के समक्ष पेश की गई परिपालन रिपोर्ट में थर्ड जेंडर के लिए किए गए कार्यों का विवरण बताया गया था। युगलपीठ ने सुनवाई के बाद उक्त आदेश जारी किए। याचिकाकर्ता की तरफ से अधिवक्ता शगुफता शन्नों खान ने पैरवी की।