केंट बोर्ड जबलपुर द्वारा लिए जा रहे एंट्री टैक्स के खिलाफ हाईकोर्ट में दायर याचिका की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट के आदेश पर केंट बोर्ड ने एंट्री टैक्स बंद किए जाने के संबंध में हलफनामा पेश किया था। सोमवार को सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने केंट बोर्ड के रवैये पर नाराजगी व्यक्त करते हुए दूसरा हलफनामा पेश करने के निर्देश दिए थे। सोमवार को याचिका की सुनवाई के दौरान केंट बोर्ड ने हाईकोर्ट से क्षमा याचना करते हुए दूसरा हलफनामा पेश करने समय प्रदान करने का आग्रह किया। हाईकोर्ट जस्टिस रवि विजय कुमार मलिमथ तथा जस्टिस पी के कौरव की युगलपीठ ने याचिका पर अगली सुनवाई 6 अप्रैल को निर्धारित की है।
सदर निवासी साहिल अग्रवाल की तरफ से दायर याचिका में कहा गया है कि केंट बोर्ड के एंट्री शुल्क का विलय जीएसटी में हो गया है। इसके बावजूद भी जबलपुर केंट बोर्ड एंट्री टैक्स वसूल रहा है। याचिका की सुनवाई के दौरान युगलपीठ को बताया गया कि इस संबंध में दिशा-निर्देश प्राप्त करने रक्षा विभाग को पत्र लिखा गया है। इसके बाद केंट बोर्ड की तरफ से पेश किए गए जबाव में बताया गया कि जीएसटी के अंतर्गत आने के बाद एंट्री शुल्क बंद किया गया है, उनके द्वारा एंट्री टैक्स वसूला जा रहा है। सुनवाई के बाद युगलपीठ ने सीईओ को व्यक्तिगत रूप से तलब किया था।
व्यक्तिगत रूप से उपस्थित हुए केंट बोर्ड के सीईओ ने युगलपीठ को बताया कि एक्ट 1924 के तहत एंट्री टैक्स लिया जा रहा है। युगलपीठ ने सुनवाई के दौरान पाया कि पूर्व में पेश किये गये जबाव में किसी नियम का हवाला दिया गया था। युगलपीठ ने सीईओ पर 25 हजार रुपये की कॉस्ट लगाते हुए नगर निगम द्वारा किसी प्रकार का एंर्टी शुल्क वसूले जाने के संबंध में जानकारी पेश करने निर्देश जारी किए थे। केंट बोर्ड ने एंट्री शुल्क एक सप्ताह में समाप्त करने की मौखिक जानकारी पेश की थी।
याचिकाकर्ता के अधिवक्ता अशोक अग्रवाल ने बताया कि याचिका पर पिछले शुक्रवार 1 अप्रैल को हुई सुनवाई के दौरान केंट बोर्ड की तरफ से पेश किये गये हलफनामें में कहा गया था कि हाईकोर्ट के आदेश पर एंट्री टैक्स बंद किया गया था। हाईकोर्ट ने नाराजगी व्यक्त करते हुए केंट बोर्ड को फटकार लगाते हुए दूसरा हलफनामा पेश करने समय प्रदान किया था। सोमवार को सुनवाई के दौरान केंट बोर्ड की तरफ से पूर्व में पेश किए गए हलफनामे के लिए मांफी मांगी। केंट बोर्ड ने नया हलफनामा पेश करने समय प्रदान करने का आग्रह किया। जिसे स्वीकार करते हुए युगलपीठ ने दो दिन का समय प्रदान किया है।