इंडियाज गॉट टैलेंट की फर्स्ट रनर अप इशिता विश्वकर्मा ने IGT की जर्नी की दिलचस्प बातें शेयर की। जबलपुर पहुंचने के बाद इशिता ने अमर उजाला से खास बातचीत की पेश हैं बातचीत के कुछ खास अंश
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सिंगर इशिता विश्वकर्मा से खास बातचीत।
- फोटो : अमर उजाला
इंडियाज गॉट टैलेंट की विनर न बन पाने का कारण आप किसे मानती हैं?
इंडियाज गॉट टैलेंट एक मल्टी टैलेंट शो है। उसमें काफी सारे अलग-अलग तरह के टैलेंट होते हैं। उसमें सोलो सिंगर स्टैंड करना मेरे लिए भी एक कठिन काम था। लेकिन ऑडियंश ने मुझे खुले दिल से प्यार दिया। बहुत आत्मीयता से सभी मेरे साथ जुड़े। ये मेरे लिए सबसे बड़ा अचीवमेंट है कि मैं ऑडियंस की फेवरेट बन सकीं। लोगों का इतना प्यार मिला, जो रिजल्ट आते हैं वे सिर्फ वोटिंग पर निर्भर नहीं करते और भी कई फैक्टर होते हैं। लगातार सात हफ्ते वोटिंग हुई है, जिसमें से 6 बार सबसे ज्यादा वोट मुझे ही मिले हैं। लोगों ने बहुत प्यार और सपोर्ट दिया है। मैं ऐसा बिल्कुल नहीं कहूंगी कि मुझे लोगों ने कम वोट दिए। जहां तक बात मेरे शो में सेकेंड आने की है तो मैंने इस अवॉर्ड को एसेप्ट किया है। ऑडियंस जो दिल से दुआ देती है वह किसी भी अवॉर्ड से बड़ी होती है। जो प्यार मैंने कमाया है, जिस दिन से मुझे लोगों को प्यार मिलना शुरू हुआ उसी दिन से मैं विनर बन गई थी। जो भी जीते मैंने उन्हें दिल से शुभकामनाएं दी। ये जिंदगी है इसका पार्ट है जीतना-हारना। ये एक छोटा सा मोमेंट होता है लाइफ का बाकी पूरी सफर ज्यादा मायने रखता है। मुझे दूसरे नंबर पर आने का कोई खेद नहीं है। मुझे बहुत खुशी है कि मैं इंडियाज गॉट टैलेंट जैसे मंच पर मैं दूसरे नंबर पर रही, क्योंकि कॉम्प्टीशन बहुत टफ होता है। आपके कॉम्प्टीशन में स्टंट है, मैजिक है, डांस है फ्लूट है, बहुत सारी चीजें होती हैं, जो भी निर्णय है मैं इसे स्वीकार करती हूं।
फिल्मों में गाना गाने का आपका सपना पूरा हो रहा है, कैसा महसूस कर रहीं हैं?
सभी जानते हैं 'द इनकॉग्नेशन सीता' जो फिल्म आ रही है उसमें सीता की आवाज मिलने का मुझे मौका मिल रहा है। सीता का किरदार निभा रही हैं कंगना रनौत जी। मनोज मुंतशिर जी ने ये मौका मुझे दिया है। IGT के सेट पर ही मुझे ये मौका मिला है, जिसके लिए साइनिंग अमाउंट भी मिला। मेरे लिए मेरी जिंदगी का सबसे बड़ा तोहफा रहा ये। मेरे माता-पिता दोनों का बचपन से सपना था कि मैं एक दिन फिल्मों में गाना गाउं। मैं फिल्म नफीसा के लिए गाना गा चुकी हूं। अभी बहुत सारी ऐसी चीजे हैं जो धीरे-धीरे जल्द ही सामने आएंगी लोगों के सामने।
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अपने पापा के साथ सिंगर इशिता विश्वकर्मा।
- फोटो : सोशल मीडिया
इंडियाज गॉट टैलेंट की पूरी जर्नी के दौरान आपने खुद में क्या बदलाव महसूस किए?
शो के दौरान मुझे वर्सटैलिटी सीखने का मौका मिला। शो के दौरान मैंने हर तरह के अलग-अलग गाने गाए। IGT के मंच पर जाने का सबसे बड़ा फायदा मुझे मिला कि मैंने अपने ही अंदर की वर्सटैलिटी को जाना।
इंडियाज गॉट टैलेंट शो के दौरान आपका फेवरेट परफॉर्मेंस कौन सा था?
IGT के मंच पर मेरा पसंदीदा परफॉर्मेंस था सत्यम शिवम सुंदरम क्योंकि ये परफॉर्मेंस मैंने जो लता जी के साथ लाइव बैंड जाया करता था उनके ऑर्टिस्ट को शो पर बुलाया गया था, मैंने उनके साथ ये गाना गाया था। मैंने 50 संगीतकारों के साथ इस गाने को गाया था, जो कि मुझे भी पसंद आया। ये गाना लता जी को मैंने समर्पित किया था।
किस तरह के गानों को गाने में आपको कठिनाई महसूस होती है?
मैं एक क्लासिकल सिंगर हूं, मुझे आशा भोसले जी के गाने कठिन लगते हैं। मैंने बचपन से लता जी के गाने गाएं हैं, जिसमें मुझे कठिनाई महसूस नहीं होती। पर आशा जी पूरी तरह से अलग हैं उनकी वॉयल क्वालिटी भी एक अलग तरह की है। उनका गाना उनकी सारी चीजें बिल्कुल अलग तरह की हैं। यहीं वजह है कि उनके गाने अटेंप्ट करना मेरे लिए चेलैंजिंग रहता है लेकिन मुझे बहुत मजा आता है, जब ऐसा कुछ सीखने को मिलता है।
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इशिता विश्वकर्मा।
- फोटो : सोशल मीडिया
आप हर रोज सुबह-सुबह मध्य प्रदेश के लोगों की नींद खराब कर देती हैं, क्या कहना चाहेंगी।
इस गाने की कहानी मैं अमर उजाला को बताना चाहूंगी। मैं उस समय 8वीं या 9वीं कक्षा में थी। स्वच्छता अभियान से जुड़ा गाना "सुन लो भैया, सुन लो दीदी, सुन लो अम्मा जी...कचरे वाली गाड़ी में सब कचरा डालो जी..." मेरे पापा रिकॉर्डिस्ट थे, जिसके चलते ये उनके पास रिकॉर्डिंग के लिए आया था। बहुत जल्दबाजी में पापा ने इसकी धुन बनाई और इसे रिकॉर्ड कराया। कुछ समय बाद नगर निगम के स्वच्छता वाहनों में हर दिन सुबह ये गाना बजने लगा, क्योंकि गाने में कहीं पर भी जबलपुर का जिक्र नहीं है, जिसके चलते इस गाने को देशभर में कई जगह पर यूज किया गया। मेरे स्कूल फ्रेंड्स मुझे कहते थे कि तुम सुबह-सुबह मेरी नींद खराब कर देती हो। हालांकि इस गाने को काफी प्यार मिला।
आपका सिंगिग का अब तक का सफर कैसा रहा?
मैंने अपने अब तक के सफर में बहुत सारे उतार-चढ़ाव देखे हैं। लोगों को लगता है कि मैंने 2019 में सारेगामापा जीता फिर इंडियाज गॉट टैलेंट में सेकेंड आई पर सच्चाई ये है कि इसके पहले मैं हारी भी बहुत हूं। कम से कम 9 से 10 रियालटी शोज मैं हार चुकी हूं। मेरा जो पूरा सफर रहा है ऐसा नहीं है कि मैं पहले ही दिन से जीतने लगी। ये लोगों को भी एक मैसेज है कि धैर्य और नेवर गिव अप वाला एटीट्यूड हमेशा होना चाहिए। मैंने बहुत छोटी उम्र में संगीत और ऑडिशन की जर्नी शुरू कर दी थी। शुरुआत में मुझे रिजेक्शन देखने पड़े इसके बाद जाकर मैं ये शो जीत पाई और अच्छा कर पाई। मैं यही कहना चाहती हूं कि इंसान हारता है तो बहुत कुछ सीखता है। मुझे मेरी हार ने बहुत कुछ सिखाया है।
आप हर दिन कितने घंटे रियाज करती हैं ?
मेरा मानना है कि एक संगीतकार दिन भर रियाज करता है, क्योंकि उसके दिमाग में वे सारी चीजें चल रहीं होती हैं। सिंगर कहीं न कहीं आपको गुनगुनाते ही मिलेंगे। बाकी अगर क्लासिकल की बात करें तो दिन में एक घंटे मैं रियाज करती हूं।
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सिंगर इशिता विश्वकर्मा
- फोटो : सोशल मीडिया
सिंगर बनने का ख्याल कैसे आया?
सिंगिंग को मैंने चुना नहीं ये मुझे बाय बर्थ ही मिला। मेरे पापा रिकॉर्डिस्ट थे और मम्मी मेरी सिंगर हैं वे म्यूजिक टीचर भी रही हैं शोज किया करती थीं। मैं जब 2 या ढाई साल की थी तब तोतली बोली मैं गाना गाती थी, मम्मी-पापा ने तब देखा कि मेरा सिंगिंग में इंटरेस्ट है तो उन्होंने मुझे सिखाना शुरू किया, ऐसे मेरा म्यूजिक का सफर शुरू हुआ। मुझे एहसास हुआ। मम्मी-पापा मुझे हर कॉम्प्टीशन में लेकर जाते थे। 2014 में मैंने सारेगामापा लिल चैंप में पार्टिसिपेट किया था, जिसमें मैं टॉप 12 में सिलेक्ट होने के बाद एलिमिनेट हो गई, उस दिन बाकी सभी लोगों को आगे जाते देख मुझे बहुत दुख हुआ। मैंने उस दिन हार के बाद ठान लिया कि अब मुझे इस मंच पर दोबारा लौट के आना है और जीत के ही वापस जाना है।
जबलपुर में आपको किस तरह की सुविधाएं मिली?
जबलपुर कला के क्षेत्र में काफी समृद्ध है। मुझे बहुत अच्छे-अच्छे गुरू मिले। डॉ. शिप्रा मैम मेरी पहली गुरू थीं, मैं चार साल की थी तब उन्होंने मुझे सिखाना शुरू किया। इसके बाद मैंने आलोक वर्मा सर से संगीत की तालीम ली। बीते 9 सालों से मैं प्रकाश करोलकर सर से सीख रही हूं। मेरे तीनों ही गुरू जबलपुर के ही रहे। जिन्होंने मुझे बहुत अच्छा सिखाया और मुझे संगीत का बहुत अच्छा ज्ञान दिया।
अपना सपना पूरा करने के लिए आपने किस तरह संघर्ष किया?
मेरा मानना है कि सपना बड़ा है तो संघर्ष छोटा नहीं हो सकता। हर बड़े इंसान के पीछे संघर्ष रहता है। तकलीफें, दिक्कतें सफलता का एक हिस्सा होती हैं, जो बहुत कुछ सिखाती हैं। मेरे जीवन में भी बहुत सर संघर्ष रह है। काफी छोटी उम्र में जिम्मेदारियां बड़ी थीं। एक फुल ऑन सपोर्ट कभी नहीं मिलता, आलोचना का सामना करना ही पड़ता है। हर लड़की की तरह मैंने भी इसे फेस किया है। लेकिन मैं इसकी शिकायत कभी नहीं करती क्योंकि बदले में भगवान ने मुझे सफलता भी बहुत दी है। लोगों का प्यार भी बहुत मिला है। हमेशा बस मेहनत करते रहना चाहिए ये सोचे बिना कि फल कब मिलेगा।
पढ़ाई और सिंगिंग को कैसे मैनेज करती हैं?
पढ़ाई और सिंगिंग को मैनेज करना बहुत मुश्किल काम है। लेकिन मैं सब कुछ मैनेज कर लेती हूं क्योंकि मैं जिस भी संस्थान की स्टूडेंट रहीं वहां मुझे बहुत सपोर्ट मिला। मैंने केंद्रीय विद्यालय से पढ़ाई की है पूरे 12 साल के स्कूल के दिनों में मुझे स्कूल के लोगों से सपोर्ट मिला। टीचर्स मुझे अलग से पढ़ा देते थे। मेरे जो फ्रेंड्स थे वे मेरे असाइनमेंट बना दिया करते थे। दोस्तों और सभी लोगों ने मुझे बहुत सपोर्ट दिया है।
खुद को मोटिवेट कैसे रखती हैं?
मेरे पापा कहा करते थे, जिंदगी एक जैसी नहीं चलती। जिंदगी ईसीजी मशीन की तरह है। ये अगर ऊपर नीचे हो रही है तो समझ लो जिंदगी चल रही है और अगर सीधी हो गई तो जीवन ही खत्म है। मैं अपने मम्मी- पापा को इसका क्रेडिट देना चाहती हूं। उन्होंने परिस्थिति के हिसाब से मुझे बड़ा किया है। जब मैं हार जाती थी तो उन्होंने हमेशा मेरा मोरल अप किया। यही कहा कि अभी तो जर्नी शुरू हुई है और भी मौके मिलेंगे। जब भी मैं जीतती थी, जब लोग सिर्फ तारीफ करते थे तब भी मम्मी-पापा ने घर में आकर मुझे डांटा। अब भी अगर मैं कुछ गड़बड़ करती हूं तो मम्मी घर में आकर मुझे डांटती हैं कहती हैं कि तुमने ये गलत किया है। मेरे जीतने पर मम्मी पापा मेरे बेस्ट क्रिटिसाइजर बने और मेरे हारने पर वे मेरे सबसे बड़े सपोर्टर बने।