इंदौर के रेलवे स्टेशन पर ट्रेन में सवार होने की जल्दबाजी में एक कथावाचक की जान चली गई। वे मालवा एक्सप्रेस में जाने के लिए ट्रेन में चढ़ने की कोशिश कर रहे थे। अचानक उनका पैर फिसला और वे पटरी पर जा गिरे। इसके बाद ट्रेन से उनका शरीर कट गया। यात्रियों ने शोर मचाया तो ट्रेन रुकी। कथावाचक को एमवाय अस्पताल में भर्ती किया गया।
पीथमपुर निवासी बालमुंकुद पिता रामनिरंजन भागवत सहित अन्य कथाओं का वाचन करते है। इसके लिए उन्हें उज्जैन बुलाया गया था। उन्होंने मालवा एक्सप्रेस से उज्जैन जाने के लिए रेल का टिकट लिया था। स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर चार पर वे ट्रेन में जाने के लिए सवार होने लगे। तब उनका संतुलन गड़बड़ाया और पैर फिसल गया। बालमुंकुद पटरी पर गिरे और ट्रेन चलने लगी। वे खुद को बचा पाते, तब तक ट्रेन के पहिए से उनका पैर कट गया था।
वहां मौजूद अन्य यात्रियों ने शोर मचाया तो ट्रेन रोकी गई। लोगों ने बालमुंकुद को पटरी से उठाया और अस्पताल पहुंचाया गया। अधिक खून बह जाने की वजह से उनकी जान नहीं बच पाई।