खरगोन बस हादसे में अफसरों की लापरवाही सामने आई है। जिस मार्ग पर हादसा हुआ, वहां ज्यादातर बसें ओवरलोड चलती हैं। कभी एक्शन नहीं होता। ग्रामीणों की शिकायत है कि हादसे की एक वजह बस की ओवरलोडिंग भी थी। बस का न तो स्टीरयिंग फेल हुआ और न ही सामने कोई वाहन था। इसके बाद भी 50 फीट ऊंचे पुल से बस नीचे सूखी नदी में गिर गई। चालक खुद बस इतनी तेज चला रहा था कि ब्रिज के पहले हल्के मोड़ पर वह स्टीरयिंग संभाल नहीं सका और बस रैलिंग तोड़कर ब्रिज से नीचे जा गिरी।
दो बार लहराई बस, फिर रैलिंग से टकरा गई
बस में सवार यात्री राहुल ने बताया कि वह ड्राइवर सीट से चौथे नंबर की सीट पर बैठे थे। डोंगरगांव के समीप बस रुकी। ड्राइवर ने बस में सवारियां बैठाई। दूसरे स्टाॅप से सवारियां बिठाने की होड़ में ड्राइवर बस तेजी से भगा रहा था। यात्रियों ने कंडक्टर को भी कहा कि बस थोड़ा धीरे चलाने को बोले, लेकिन उसने भी नहीं सुनी। ब्रिज आने के बावजूद ड्राइवर ने रफ्तार कम नहीं की और ब्रिज से पहले मोड पर बस दो बार लहराई। स्पीड कम नहीं होने से बस रैलिंग से टकराई और नदी में जा गिरी।
घायल बोले मंत्री से- तेज बस चला रहा था ड्रायवर