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MPPSC: बैंक में परेशान बुजुर्ग महिला को देख अधिकारी बनने का ठाना, महिला वर्ग में बनीं एमपीपीएस टापर

Sat, 10 Jun 2023 07:07 PM IST
अर्जुन रिछारिया न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, इंदौर

सार

इंदौर की निधि भारद्वाज को दूसरा स्थान मिला है, महिला वर्ग में वे पहले स्थान पर हैं। तीसरे नंबर पर सिम्मी यादव हैं। 
 
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निधि भारद्वाज - फोटो : अमर उजाला, इंदौर
एमपीएससी 2020 के रिजल्ट में इंदौर की निधि भारद्वाज को दूसरा स्थान मिला है। महिला वर्ग में वे पहले स्थान पर हैं। मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग ने शुक्रवार को फाइनल रिजल्ट घोषित किया। इसमें 221 अभ्यर्थियों का चयन हुआ है। इसमें मुरैना के अजय गुप्ता ने 1575 अंकों में से 939 अंक लाकर टॉप किया है। वहीं निधि को 924 अंक मिले हैं। निधि भारद्वाज भोपाल की रहने वाली हैं और उन्होंने इंदौर के जीएसआईटीएस कालेज से इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है। वे 2016 से परीक्षा की तैयारी कर रहीं थी। एसजीएसआइटीएस से इंजीनियरिंग के बाद उन्होंने दो साल निजी क्षेत्र की कंपनी में नौकरी की, मगर समाज सेवा में जाने की सोच ने उन्हें यह राह दिखाई। निधि को ये कामयाबी दूसरे प्रयास में मिली है। उन्होंने 2016 में इंजीनियरिंग के बाद उन्होंने पुणे में एक ऑटोमोबाइल कंपनी में काम शुरू कर दिया था। 

सफलता का श्रेय बड़ी बहन और पिता को दिया
निधि के पापा चंद्रकांत भारद्वाज आर्मी में सूबेदार मेजर हैं। वो सहारनपुर में पदस्थ हैं। मम्मी राधा भारद्वाज हाउस वाइफ हैं। उनकी तीन बहनें हैं। बड़ी बहन नम्रता भी पीएससी की तैयारी कर रही हैं। छोटी बहन सिद्धी का लॉ कम्पलीट हुआ है। निधि ने कहा कि वे अपनी सफलता का श्रेय अपने परिवार और खासतौर से अपनी बड़ी बहन को देना चाहेंगी। बड़ी बहन की गाइडेंस की वजह से उन्हें ये बड़ी कामयाबी मिली है। पिता ने भी उन्हें सरकारी नौकरी में जाने के लिए बहुत प्रोत्साहित किया। 

बुजुर्ग महिला ने दिखाई राह
एक दिन निधि किसी काम से बैंक गईं थीं। वहां एक बुजुर्ग महिला को परेशान देख वे उसकी मदद करने लगीं। महिला अपनी पेशन के लिए कई दिनों से बैंक के चक्कर काट रही थी। उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि किससे मिलना है और कैसे पेंशन लेना है। निधि ने उनकी मदद की और उनका काम हो गया। उसी दिन उन्होंने ठाना कि सरकारी नौकरी में जाकर सिस्टम को बेहतर बनाने के लिए काम करना है। 

सक्सेस टिप्सः व्हाट्सएप भी नहीं चलाया, रोज दस घंटे पढ़ाई की
उन्होंने सोशल मीडिया से पूरी तरह से दूरी बनाकर रखी और अपने लक्ष्य के प्रति पूरी ईमानदारी के साथ डटी रही। 
2016 में उन्होंने फेसबुक बंद कर दिया था। तीन साल से उनके फोन में व्हाट्सएप नहीं है। इंस्टाग्राम पर उन्होंने कभी आईडी ही नहीं बनाई।
उन्होंने तैयारी के दौरान रोजाना 10-12 घंटे पढ़ाई की।
तनाव को दूर करने के लिए वे इंस्ट्रूमेंटल म्यूजिक सुनती थीं।
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सिम्मी यादव - फोटो : अमर उजाला, इंदौर
सेल्फ स्टडी और अनुशासन से पाई सफलता
इंदौर की सिम्मी तीसरे स्थान पर रही हैं। सिम्मी इंदौर में नगर निगम के कर्मचारी नेता राजेंद्र यादव की बेटी हैं। सिम्मी यादव ने बताया कि पीएससी-2019 में इंटरव्यू की प्रक्रिया तक पहुंची थी। उसका परिणाम नहीं आया है, जबकि पीएससी-2020 का रिजल्ट आया है। इसके लिए 12 से 14 घंटे पढ़ाई करती थी। उन्होंने एमएससी कंप्यूटर साइंस की पढ़ाई पूरी की है। वे दो वर्ष नौकरी करने के बाद यूपीएससी की तैयारी करेंगी। 

सेल्फ स्टडी पर किया फोकस
सिम्मी ने बताया कि उन्होंने कई कोचिंग संस्थाओं के शिक्षकों की पढ़ाई में मदद की लेकिन सेल्फ स्टडी पर अधिक फोकस किया। उन्होंने बताया कि अनुशासन के साथ पढ़ाई पर ध्यान देने से ही यह सफलता मिली है। पढ़ाई के दौरान मैंने पूरी तरह से अपना फोकस किताबों पर ही रखा। 
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