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Indore: फिल्म एनिमल पर क्या बोल गए मिर्जापुर के इंस्पेक्टर रामशरण, लिट चौक में पहुंचे एक्टर अमित सियाल

Fri, 15 Dec 2023 07:01 PM IST
अर्जुन रिछारिया न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर

सार

इंदौर में आयोजित लिट चौक में फिल्म अभिनेता अमित सियाल ने चर्चा की, उन्होंने शहरवासियों के प्रश्नों के रोचक अंदाज में जवाब दिए। हाल ही में आई फिल्म एनिमल दिखाई क्रूरता पर भी वह बेबाक अंदाज में बोले।
 
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अमित सियाल ने इंदौर में कई विषयों पर अपनी बेबाक राय रखी। - फोटो : अमर उजाला, इंदौर
मिर्जापुर जैसी कई फिल्मों में अपने अभिनय की छाप छोड़ने वाले अमित सियाल ने इंदौर में आयोजित लिट चौक में शिरकत की। गौरतलब है कि अमित ने मिर्जापुर में इंस्पेक्टर राम शरण के किरदार से काफी लोकप्रियता हासिल की थी। इंदौर आए अमित ने अपने करियर और बॉलीवुड के साथ ओटीटी जैसे कई विषयों पर चर्चा की। इंदौर में हुए कार्यक्रम के अंत में उन्होंने खुद लिखा हुआ गीत भी गुनगुनाया। उनसे बातचीत के अंश...

प्र. आपने एक बार कहा था कि आपको स्ट्रगल नहीं करना पड़ा, ये कितना सच है?
उ. यह सच है कि मुझे पहले रोल के लिए स्ट्रगल नहीं करना पड़ा लेकिन सफलता के बाद जो गलतियां होती हैं उनकी वजह से मुझे बहुत स्ट्रगल करना पड़ा। दरअसल, पहले ही प्रयास में काम मिल जाने के बाद मैं खुद को संभाल नहीं पाया और मुझे लगा कि सबकुछ आसानी से हो जाता है जबकि बाद में मुझे आगे बढ़ने के लिए बहुत मेहनत करना पड़ी। 

प्र. ग्रे शेड्स के रोल से क्या दिक्कतें होती हैं?
उ. अभिनेता कोई भी रोल करे वह उसमें पूरी तरह से डूब जाता है। यदि वह रोल नकारात्मक है तो उसे इसके साइड इफेक्ट्स भी झेलने पड़ते हैं। कई बार यह होता है कि हम उस किरदार में इतना डूब जाते हैं कि उससे बाहर ही नहीं निकल पाते। इसका व्यक्तित्व पर लंबे समय तक असर रहता है। कई बार उससे बाहर आने के लिए बहुत संघर्ष भी करना पड़ता है। हालांकि, यह हर अभिनेता के काम का हिस्सा है। 

प्र. कानपुर से दिल्ली आने पर आपके कैसे अनुभव रहे?
उ. जब मैं कानपुर से दिल्ली आया तो बहुत अजीब लगा क्योंकि पूरा कानपुर एक परिवार के जैसा लगता था। दिल्ली बहुत बड़ी है और हर इंसान अजनबी था। कानपुर में लड़कियां पटाना, मौज मस्ती करना और दोस्तों के साथ घूमना ही जीवन था लेकिन जब दिल्ली आए तो पता चला कि जीवन में सफलता पाने के लिए कितना संघर्ष करना पड़ता है। 
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लिट चौक में सवालों के जवाब देते अमित। - फोटो : अमर उजाला, इंदौर
प्र. एनिमल Animal Movie और मिर्जापुर जैसी फिल्मों में जो क्रूरता दिखाई जा रही है वह कितनी सही है?
उ. फिल्म में जिस सीन की जरूरत है वही दिखाया जाना चाहिए। यदि उसकी जरूरत है तो कुछ भी गलत नहीं है। यदि आपने अनावश्यक गाली डाली है या अनावश्यक ही गला काटने का सीन डाला है तो दर्शक खुद ही उसको नकार देगा। समाज में भी बहुत क्रूर लोग हैं। उनके जीवन को जब हम पर्दे पर दिखाएंगे तो यह सब तो दिखाना ही पड़ेगा। इसमें कुछ भी गलत नहीं है। 

प्र. ओटीटी पर स्तरहीन वेबसिरीज आ रही हैं, उस पर आपके क्या विचार हैं?
उ. ओटीटी को मैं एक बेहतर मंच मानता हूं और उसने मुझे भी निखारा है। यहां पर बजट की समस्या नहीं है और आपको दायरों में काम नहीं करना है। यहां पर स्वतंत्रता है। हां यह भी सच है कि यदि किसी वेब सिरीज में अचानक ही कोई गाली आ जाती है तो आप परिवार के बीच असहज हो जाते हैं। इसके लिए यह नियम अवश्य आने चाहिए कि आपकी वेब सिरीज में जो भी आने वाला है उसकी जानकारी पहले ही दे दी जाए ताकि यदि कोई परिवार के साथ उस वेब सिरीज को देखे तो उसे इस तरह की असहज स्थिति का सामना न करना पड़े। 

प्र. क्या कभी राजनीति में जाएंगे?
उ. मैं अभी इस पर कुछ नहीं कह सकता लेकिन ना भी नहीं कहूंगा। यह जरूर कहूंगा की यदि राजनीति में गया तो पहले अपना घर और परिवार पूरी तरह से सुरक्षित करके जाऊंगा। ताकि ईमानदारी से काम कर सकूं। 

प्र. जो रोल आपको मिलना थे वो अभी तक नहीं मिले, क्या कमी रह गई?
उ. मैं खुद की मार्केटिंग नहीं कर सकता। मुझे पर्सनल रिलेशन बनाना भी नहीं आते। इसी वजह से शायद मुझे अभी तक कई बड़े काम नहीं मिले। हालांकि मेरा मानना है कि जिसके भाग्य में जो लिखा होता है वह मिल ही जाता है। 
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