इस बीच प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता नीलाभ शुक्ला ने दावा किया कि नगर निगम प्रशासन ने इस घटना की जांच के नाम पर लीपापोती की है और बुजुर्गों से अमानवीय बर्ताव के लिए जिम्मेदार बडे़ अफसरों को अनुशासनात्मक कार्रवाई से बचा लिया है।
निगम के एक अधिकारी ने जानकारी दी कि शहरी निकाय के एक अतिरिक्त आयुक्त की अगुवाई में गठित तीन सदस्यीय समिति की जांच रिपोर्ट के आधार पर आयुक्त प्रतिभा पाल ने यह फैसला लिया। उन्होंने बताया कि जांच में साबित हुआ है कि भीख मांगकर गुजारा करने वाले बेसहारा बुजुर्गों को इंदौर की शहरी सीमा से जबरन बाहर छोड़े जाने की घटना में संबंधित अस्थायी कर्मचारियों की सीधी भूमिका थी।
गौरतलब है कि देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर के 13 दिन पुराने घटनाक्रम के कई वीडियो सोशल मीडिया पर पहले ही वायरल हैं। इनमें नजर आ रहा है कि नगर निगम के अतिक्रमण निरोधक दस्ते के ट्रक के जरिये बेसहारा बुजुर्गों को नजदीकी क्षिप्रा गांव के पास सड़क किनारे छोड़ा जा रहा है।
हालांकि, उस समय कुछ जागरूक ग्रामीणों ने इस अमानवीय घटना पर नाराजगी जताई थी और इसे मोबाइल कैमरे में कैद कर लिया। इससे घबराए नगर निगम कर्मचारी वीडियो में बुजुर्गों को दोबारा ट्रक में बैठाते दिखाई दे रहे हैं।
वायरल वीडियो के जरिये पता चला कि जिन बुजुर्गों के साथ यह घटना हुई, उनमें से कुछ अधिक उम्र के चलते अपने बूते पर चलने-फिरने में भी सक्षम नहीं हैं। वीडियो में साफ दिख रहा है कि वह हताश होकर सड़क किनारे बैठ गए हैं। इनमें कुछ दिव्यांग भी शामिल हैं और बेसहारा लोगों के सामान की पोटलियां सड़क किनारे यहां-वहां बिखरी नजर आ रही हैं।