नदी में छोड़ा जा रहा था दूषित जल
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नदी-नालों में दूषित जल बहाने वाले उद्योगों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। पिछले दिनों अपर कलेक्टर पवन जैन के नेतृत्व में जांच दल बनाया गया था जिसने कान्ह नदी में दूषित जल फेंकने वाले उद्योगों के विरुद्ध कार्रवाई की थी। दल ने कुम्हेड़ी, औद्योगिक क्षेत्र सांवेर रोड तथा देवास नाका स्थित औद्योगिक इकाइयों एवं सीईटीपी का निरीक्षण किया था।
निरीक्षण के दौरान औद्योगिक क्षेत्र सांवेर स्थित गोल्डी इंडस्ट्रीज द्वारा दूषित जल बिना उपचार के ही सीईटीपी में भेजे जाने के कारण उद्योग को तत्काल बंद करवाया गया एवं निर्देशित किया कि जल्द से जल्द फैक्टरी में ईटीपी की स्थापना करें। इसके बाद ही उत्पादन की अनुमति दी जाएगी। इसी प्रकार मेसर्स गुरुकृपा इंडस्ट्रीज सेक्टर-सी औद्यागिक क्षेत्र सांवेर रोड ईटीपी बंद पाया गया एवं दूषित जल सीधे ही नरवल नाले में निस्सारित होते पाया गया। उद्योग को तत्काल सील कर समस्त आउटलेट बंद करने के निर्देश दिए गए। क्षेत्र में स्थित सीईटीपी का भी निरीक्षण किया गया एवं निर्देश दिए कि बिना प्राइमरी ट्रीटमेंट के दूषित जल नहीं लिया जाए एवं जिन उद्योगों द्वारा पाइपलाइन के माध्यम से दूषित जल भेजा जाता है, उनके दूषित जल की जांच की जाए।
उत्पादन बंद करवाकर सील की फैक्टरी
इन सबके बाद दल खातीपुरा, सुखलिया स्थित अनिकेत प्लॉस्टिक का औचक निरीक्षण करने पहुंचा। यहां पाया कि फैक्टरी द्वारा सीधे ही दूषित जल परिसर के बाहर फेंका जा रहा है। उद्योग खान नदी के समीप स्थापित है तथा पर्यावरण गंभीर रूप से प्रदूषित कर रहा था। इसके चलते फैक्टरी यूनिट का उत्पादन तत्काल बंद करवाया और उसे सील कर बिजली कनेक्शन काटा गया। इसी तरह की कार्रवाई किशोर इंटरप्राइजेस, खातीपुरा सुखलिया, इलेक्ट्रोप्लेटिंग इकाई पर भी की गई।