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'सरकार के शोषण ने छीन ली मेरी बीवी की खूबसूरती'

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‘सरकार की प्रताड़ना ने मेरी बीवी की खूबसूरती छीन ली। इसका असर मेरे पूरे परिवार पर हुआ।’ 1993 बैच के दलित वरिष्ठ आईएएस रमेश थेटे ने अपना दर्द कुछ इस तरह बयां किया। मध्य प्रदेश काडर के आईएएस अफसर थेटे और निलंबित महिला आईएएस शशि कर्णावत ने राज्य सरकार की कथित ज्यादतियों से परेशान होकर मोर्चा खोल दिया है।
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सोमवार को दोनों अफसरों ने सरकार के खिलाफ आवाज बुलंद की और धरना दिया। राज्य के इतिहास में पहली बार है, जब दो आईएएस सरकार के खिलाफ धरना दे रहे हैं। दोनों दलित आईएएस अफसरों पर भ्रष्टाचार के आरोप हैं। इससेपहले मुख्य सचिव को एक चिट्ठी में थेटे ने लिखा, ‘मुख्यमंत्री ने लोकायुक्त को मेरे खिलाफ केस चलाने की मंजूरी देकर मेरे डेथ वारंट पर दस्तखत किए हैं।

थेटे अपनी बात करते हुए मंच पर रो पड़े। उन्होंने कहा कि अगर सरकार ने अब उन्हें कारण बताओ नोटिस भी भेजा, तो वह अन्न-जल त्याग कर मौत को गले लगा लेंगे। थेटे ने कहा कि 2002 से मेरे खिलाफ 10 मामले दर्ज किए गए हैं, जिसमें से नौ में मुझे क्लीनचिट दी गई है।
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एमपी में सरकार के खिलाफ धरने पर बैठे दो आईएएस

उन्होंने कहा कि गलत भावना और उनके दलित होने के कारण उन्हें निशाना बनाया जा रहा है। कर्णावत को प्रिंटिंग घोटाले में विशेष न्यायालय से पांच साल कैद और पचास लाख रुपये जुर्माने की सजा हो चुकी है। कर्णावत ने आरोप लगाया कि एमपी सरकार 27 महीने से उन्हें प्रताड़ित कर रही है।

उन्हें वेतन नहीं दिया जा रहा। दोनों पर भ्रष्टाचार के मामले दर्ज हैं। कर्णावत खुद पर लगे भ्रष्टाचार के मामले को वापस लेने की मांग कर रही हैं। उनका आरोप है कि वे चूंकि दलित हैं, इसलिए उन्हें टारगेट किया जा रहा है और कोई सुनवाई नहीं हो रही है। दलित आदिवासी फोरम के संयोजक डॉ. मोहनलाल पाटिल का कहना है कि शासकीय सेवाओं में जाति के आधार पर भेदभाव हो रहा है।

दोनों अफसरों ने दलित आदिवासी फोरम के बैनर पर स्थानीय अंबेडकर मैदान पर धरना दिया और भाषण दिए। थेटे इस समय बाल संरक्षण आयोग के सचिव हैं।
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