कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और प्रदेश के पूर्व सहकारिता मंत्री भगवान सिंह यादव को विशेष कोर्ट ने जिला सहकारी बैंक में स्टेशनरी खरीदी में भ्रष्टाचार से जुड़े एक मामले में तीन साल की सजा सुनाई है। इस मामले में दो लोगों को तीन-तीन जबकि चार लोगों को चार-चार साल की सजा के साथ कोर्ट ने जुर्माना भी लगाया है।
आठ लोगों के खिलाफ हुआ था केस दर्ज
मामले की कई सालों तक जांच चली। जांच-पड़ताल के बाद आर्थिक अपराध ब्यूरो (एईओडब्ल्यू) ने इनमें बैंक के तत्कालीन अध्यक्ष भगवान सिंह यादव और मैनेजर मुकेश माथुर सहित आठ लोगों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत केस दर्ज किया था। इसमें दो लोगों की गिरफ्तारी हुई थी, जबकि यादव सहित छह आरोपियों को जमानत मिल गयी थी।
सहकारी बैंक के तत्कालीन अध्यक्ष भगवान सिंह यादव और डीके जैन को दो अलग-अलग मामलों में तीन-तीन साल की सजा सुनाई गई। साथ ही 15 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया। ये दोनों सजाएं एक साथ चलेंगी।आरोपी ईशान चंद्र अवस्थी, गजेंद्र श्रीवास्तव, शीला गुर्जर और संजीव शुक्ला को दो अलग-अलग मामलों में क्रमशः तीन और चार-चार साल के कारावास और 15-15 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया।
सजा सुनाने के बाद भगवान सिंह यादव और डीके जैन के एडवोकेट ने अदालत के समक्ष जमानत के लिए आवेदन दिया कि उनके पक्षकार को तीन-तीन साल की सजा हुई है। जिसमें उन्हें जमानत दी जा सकती है । कोर्ट ने इस आवेदन को स्वीकार कर फौरी राहत दी। उन्हें जमानत पर रिहा कर निर्देश दिया गया कि वे एक माह के अंदर अपनी पक्की जमानत करा लें लेकिन बाकी चार आरोपियों को चार-चार साल की सजा होने पर उन्हें जेल भेज दिया गया।