मध्यप्रदेश में पिछले कुछ दिनों से नहीं हो रही बारिश ने चिंता बढ़ा दी है। मालवा और निमाड़ पहले से ही सूखे की चपेट में थे। अब जबलपुर और बुंदेलखंड के हालात भी बिगड़ते जा रहे हैं । भोपाल, ग्वालियर, मुरैना और सागर जैसे बड़े शहरों में कम बारिश ने चिंता की लकीरें खींच दी हैं। मौसम विभाग की मानें तो अगर 10 दिन में इन इलाकों में बारिश नहीं हुई तो लोगों को सूखे की मार झेलनी पड़ेगी। हालांकि, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर और सिंगरोली में सामान्य से ज्यादा बारिश ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है।
इस साल देश में मानसून ने समय से पहले ही दस्तक दे दी थी । 27 जून से पहले ही मानसून की बारिश शुरू हो गई थी। धमाकेदार बारिश के कारण मध्यप्रदेश में भी जमकर बारिश हुई थी, लेकिन पिछले कुछ दिनों से प्रदेश में कम बारिश होने से हालात बिगड़ने लगे। करीब 22 दिन तक बारिश नहीं होने से प्रदेश के कई इलाके सूखे की चपेट में आ गए। वहीं, ग्वालियर चंबल में ज्यादा पानी गिरने से बाढ़ की स्थिति बनी हुई है। वहीं, प्रदेश के औसत से ज्यादा बारिश वाले जिले भी सूखे की चपेट में है।
13 जिलों में बारिश नहीं होने सूखे के हालात
प्रदेश के 13 जिले सूखे की चपेट में हैं। यहां औसत से कम बारिश के कारण लोग परेशान हैं। पीने के पानी से लेकर फसलों तक के लिए पानी नहीं मिल रहा। इंदौर, हरदा, धार, खरगोन, बड़वानी, पन्ना, दमोह, कटनी, जबलपुर, सिवनी, छतरपुर, मंडला और बालाघाट लगातार सूखे की मार झेल रहे हैं। यहां औसत से भी कम बारिश हुई है, जिससे यहां का वॉटर लेवल कम हो गया है।
ग्वालियर-चंबल में बारिश बनी मुसीबत
शुरुआती दौर में ग्वालियर-चंबल में बारिश ना के बराबर हुई, लेकिन बाद में हुई बारिश ने यहां तबाही मचा दी। ग्वालियर-चंबल में 50 साल बाद इतनी भीषण बाढ़ आई। भिंड, श्योपुर, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, विदिशा, राजगढ़, आगर-मालवा, शाजापुर, उज्जैन, मंदसौर और सिंगरौली में सबसे ज्यादा बारिश हुई। ग्वालियर और चंबल इलाकों में तो बाढ़ आ गई। बाढ़ की वजह से बड़ी संख्या में फसलें बर्बाद हो गई। इसके अलावा कई घरों को नुकसान पहुंचा।