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Damoh: सरकारी डॉक्टर लिख रहे ऐसी दवाइयां, जो प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र पर नहीं मिलतीं, मरीज परेशान

Thu, 07 Dec 2023 04:13 PM IST
दिनेश शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दमोह

सार

दमोह के जिला अस्पताल में बने प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र का उतना उपयोग नहीं हो पा रहा है, जितने की अपेक्षा की जा रही थी। इसके पीछे की वजह बताई जा रही है कि यहां के कुछ डॉक्टर ऐसी दवाएं ही नहीं लिख रहे जो यहां मिल सकें।  
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दमोह के जिला अस्पताल स्थित प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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दमोह के जिला अस्पतला के मरीज अलग तरह की परेशान झेल रहे हैं। यहां के कुछ डॉक्टर मरीजों को ऐसी दवाएं लिख रहे हैं, जो यहां बनी प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र पर भी नहीं मिल रहीं। मजबूरी में बाहर से महंगे दामों पर खरीदना पड़ रही हैं।
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बता दें कि लोगों को कम कीमत पर इलाज में उपयोग होने वाली दवाइयां मिल सकें इसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जन औषधि केंद्र खुलवाए हैं ताकि लोगों को यहां एक ही स्थान पर सभी दवाइयां उपलब्ध हो सकें। पूरे देश के साथ दमोह में भी जिला अस्पताल के समीप प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र खोला गया है। ताकि प्रतिदिन जिला अस्पताल में इलाज कराने के लिए आने वाले हजारों मरीजों को वो दवाइयां कम कीमत पर मिल सकें जो अस्पताल में उपलब्ध न हों, लेकिन ऐसा नहीं हो पा रहा है। ड्यूटी डॉक्टर कुछ दवाएं ऐसी लिख रहे हैं, जो जन औषधि केंद्र से नहीं मिल पा रहीं। जिससे लोगों को मजबूरी में मंहगे दाम पर दवाइयां खरीदनी पड़ रही हैं, जबकि जन औषधि केंद्र पर पदस्थ फार्मासिस्ट के बताए अनुसार उनके यहां सभी प्रकार के रोगों की दवाइयां उपलब्ध हैं।

850 प्रकार की दवाएं हैं उपलब्ध
प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र पर पदस्थ फार्मासिस्ट ने बताया कि इस केंद्र का संचालन रोटरी क्लब द्वारा किया जाता है और वर्तमान में उनके यहां 850 प्रकार की दवाइयां उपलब्ध हैं। जिला अस्पताल में प्रतिदिन सैकड़ों मरीज ओपीडी में पदस्थ डॉक्टर के पास अपनी बीमारी से संबंधित रोग का इलाज कराने पहुंचते हैं, लेकिन जो डाक्टर नए पदस्थ हुए हैं, बहुत कम संख्या में यहां मरीजों को दवाई खरीदने भेजते हैं और जिन लोगों को भेजते हैं उनके पर्चे में गिनी-चुनी दवाई प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र की लिखी होती हैं और अधिकांश दवाइयां कंपनी की लिखी होती हैं। इस कारण से मरीज मेडिकल स्टोर्स पर जाकर वो दवाइयां खरीदते हैं। यहां केवल उन्हीं दवाइयों को लेने के लिए मरीज को भेजा जाता है जो दवाई जिला अस्पताल में उपलब्ध न हों, लेकिन इसके बाद भी डॉक्टर पर्चे में कंपनी की दवाई लिखते हैं जिससे मरीज भी यह नहीं समझ पा रहे इस प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र पर सस्ती दवाइयां मिलती हैं। जो दवाई बाजार में हजारों रुपये की मिलेगी वह दवा यहां पर महज कुछ रुपयों में उपलब्ध हो जाती है।
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सरकारी से ज्यादा निजी डॉक्टर भेजते हैं मरीज
आमतौर पर देखा जाता है कि निजी डॉक्टर के यहां जो मरीज अपना चेकअप कराने जाते हैं उन्हें दवाइयां डाक्टरों द्वारा बताए गए मेडिकल स्टोर्स से ही खरीदनी पड़ती है और अमूमन सभी निजी डॉक्टर यही करते हैं। कहा जाता है कि उनका कंपनी से टाइअप रहता है फिर चाहे वह दवा कितनी भी मंहगी क्यों न हो, लेकिन कुछ डॉक्टर मरीजों की आर्थिक हालत भी समझते हैं और वह अपने पर्चे पर प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र की दवाइयां लिखते हैं ताकि मरीज को कम कीमत पर अच्छी दवाइयां मिल सकें। प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र पर पदस्थ फार्मासिस्ट अभिषेक सेन ने बताया कि उनके पास प्रतिदिन 50 से 60 मरीज निजी डॉक्टरों के पर्चे लेकर आते हैं और सरकारी अस्पताल के महज तीस मरीज ही दवाई के पर्चे लेकर उनके पास आते हैं इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि डॉक्टर भी नहीं चाहते कि मरीज को कम कीमत पर बाहर से दवाइयां मिल सकें। 

यहां पहुंचीं महिला मरीज सरस्वती ,तनय नेमा, तुलसाबाई रैकवार ने बताया कि उन्हें पता चला कि इस जन औषधि केंद्र पर मेडिकल स्टोर्स की अपेक्षा कम कीमत पर दवाइयां मिलती हैं इसलिए वे यहां दवाई लेने पहुंचे हैं। डॉक्टर यहां दवा लेने तो भेजते हैं, लेकिन कुछ दवा मेडिकल स्टोर्स की भी लिखी होती हैं।

इतना होता है दवाओं में अंतर
जन औषधि केंद्र के फार्मासिस्ट ने बताया कि दवा तो वही रहती है केवल कंपनी का लेबल लग जाता है और वही दवा हजारों रुपये में बिकती है। उन्होंने बताया कि हार्ट की समस्या से संबंधित इंजेक्शन बाजार में 1200 रुपये में आता है यहां 340 रुपये में मिलता है। इसी प्रकार की दवाइयों का पैकेट जो दो सौ से तीन सौ रुपये में आता है यहां पर पचास रुपये में उपलब्ध हो जाता है। कीमत में इतना अधिक अंतर होता है। उन्होंने अस्पताल प्रबंधन से दो नंबर गेट खोलने की मांग भी की है क्योंकि मरीज के आने,जाने के लिए केवल एक गेट है जिससे वह प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र तक नहीं आ पाता और मेडीकल स्टोर्स पर पहुंच जाता है।

नहीं उठाया फोन
फार्मासिस्ट द्वारा बताए अनुसार जिला अस्पताल के डॉक्टरों के द्वारा प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र की दवाइयां कम लिखी जा रही हैं। जब इस संबंध में अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ. राजेश नामदेव को करीब कई बार फोन लगाया, लेकिन उनका फोन रिसीव नहीं हुआ जिससे उनका पक्ष नहीं लिया जा सका।
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