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Damoh: चार दिन से आमरण अनशन पर बैठे ग्रामीण, पंचायत की रिकवरी की राशि न वसूले जाने से हैं खफा

Thu, 15 Feb 2024 05:08 PM IST
दिनेश शर्मा अमर उजाला, न्यूज डेस्क, दमोह

सार

ग्राम पंचायत सारसबगली में 9 ग्रामीण 12 फरवरी से आमरण अनशन पर बैठे हुए हैं। इन ग्रामीणों ने अपना अनशन गांव में लगे पीपल के पेड़ के नीचे शुरू किया है, गुरुवार को अनशन का चौथा दिन है।
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दमोह के ग्रामीम चार दिन से आमरण अनशन पर बैठे हैं। - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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दमोह जिले की तेंदूखेड़ा जनपद की ग्राम पंचायत सारस बगली इस समय दो पक्षों के बीच बंट गई है और इस कारण से विकास कार्य भी ठप पड़े हैं। एक पक्ष पुराने मामले में हुई वसूली की मांग को लेकर चार दिन से अनशन पर बैठा है। वहीं दूसरे पक्ष की ओर से गांव के तीन दर्जन से ज्यादा ग्रामीणों ने तेंदूखेड़ा एसडीएम ब्रजेश सिंह को ज्ञापन देकर अनशन पर बैठे लोगों पर कार्रवाई की मांग की है। 
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ग्रामीणों का कहना है कि ग्राम पंचायत और शिकायतकर्ताओं के विवाद में गांव का विकास रुका हुआ है। वहीं अनशनधारियों ने अनशन पर बैठने  के पूर्व इसकी लिखित सूचना दमोह कलेक्टर, एसपी सहित अन्य अधिकारियों को दे दी है।

यह है मामला
ग्राम पंचायत सारसबगली में 9 ग्रामीण 12 फरवरी से आमरण अनशन पर बैठे हुए हैं। इन ग्रामीणों ने अपना अनशन गांव में लगे पीपल के पेड़ के नीचे शुरू किया है, गुरुवार को अनशन का चौथा दिन है। अनशन पर बैठे लोगों की मांग है कि सारस बगली ग्राम पंचायत में पूर्व सरपंच के कार्यकाल में हुए भ्रष्टाचार की शिकायत उनके द्वारा की गई थी। इसमें 11 लाख 563 रुपये की रिकवरी निकली थी। यह जांच जिला पंचायत सीईओ के निर्देश पर हुई थी, लेकिन आज तक इनकी वसूली नहीं हुई है। जिन कार्यों की उस समय जांच हुई थी उनमें मेड़ बंधान, खखरी निर्माण के साथ अन्य कार्य थे और इस रिकवरी का पत्र उनको उस समय दिया गया था जब यही लोग पूर्व वर्षों में भूख हड़ताल पर बैठे थे और रिकवरी निकालने के बाद उन्होंने अपना अनशन तोड़ा था। लेकिन, तीन वर्ष बाद भी वसूली नहीं हुई इसलिए फिर वही 9 ग्रामीण आमरण अनशन पर बैठ गए हैं।
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अनशन पर बैठे लोगों पर की जाए कार्रवाई
ग्राम सारस बगली के तीन दर्जन से भी ज्यादा ग्रामीण तेंदूखेड़ा तहसील पहुंचे, जहां उन्होंने एसडीएम को लिखित ज्ञापन देते हुए अनशनधारियों पर कार्रवाई करने की मांग की है। दिए गए ज्ञापन में बताया कि जो लोग अनशन पर बैठे हैं, वे पिछले पांच वर्षों से लगातार पंचायत के कार्यों में परेशानी पैदा कर रहे हैं और उनके कारण हमारे गांव का विकास नहीं हो पा रहा है। ग्रामीणों ने बताया कि आज गांव की स्थिति जस की तस है। गांव से निकलने के लिए मार्ग नहीं है और दलदल मचा हुआ है। शिकायतकर्ता और अनशन धारी के चलते कोई भी सचिव पंचायत जाने को तैयार नहीं है। साथ ही पंचायत के कर्मचारी गांव के किसी भी विकास कार्य को करने के लिए तैयार नहीं हैं। उनका कहना होता है कि हर कार्य की शिकायत होती है इसलिए हम लोगों को किसी तरह का निर्माण कार्य नहीं करना है। 

न्यायालय में है मामला
पुराने मामले की रिकवरी को लेकर जो लोग अनशन पर बैठे हैं, उनमें दशरथ यादव, गुड्डू गोंड, बलराम गोंड, आनंद यादव, वीरन पाल, भारत गोंड, इंदुर गोंड, गोपाल यादव के अलावा दो अन्य हैं। अनशनधारियों की मांग है कि जो पुरानी रिकवरी सरपंच, सचिव और रोजगार सहायक पर निकली थी वह आज तक जमा क्यों नहीं की गई है। हम लोग अनशन तभी समाप्त करेंगे जब रिकवरी की राशि पंचायत के खाते में जमा होगी। अनशनधारियों के विरोध में एसडीएम को ज्ञापन देने आए ग्रामीणों में पंचायत के उप सरपंच जगन्नाथ यादव, छपन्न सिंह घोसी, कैलाश रैकवार, बृजेश ठाकुर, सूरज गोंड, जगदीश अहिवार, रत्नेश यादव, कमलेश विश्वकर्मा, अनिल यादव ने बताया कि अनशनधारियों ने पूर्व में जांच करवाई थी। उस पर रिकवरी निकाली थी। लेकिन वह शासन का मामला है, लेकिन लगातार शिकायत और अनशन पर बैठने के कारण हमारे गांव  का पूरा विकास ठप हो गया है। पिछले पांच वर्ष से ग्राम पंचायत में कोई भी निर्माण कार्य नहीं हुआ है। जो लोग अनशन पर बैठे हुए हैं और जिस समस्या को लेकर बैठे हुए हैं उसका मामला तेंदूखेड़ा न्यायालय में चल रहा है।

ज्ञापन के दौरान उपसरपंच ने बताया कि हम लोग यही चाहते हैं कि हमारे गांव का विकास हो और उसमें जो बाधा बन रहा है उस पर कार्रवाई की जाए। जो लोग अनशन पर हैं उनका अनशन गांव हित में नहीं है। इसलिए हम सभी की मांग है कि अनशन धारियों को उठाया जाए। अनशन पर बैठे ग्रामीण और अनशनधारियों के विरोध में दिए गए ज्ञापन को लेकर तेंदूखेड़ा एसडीएम ने बताया कि मैं भी दो दिन पहले जनपद सीईओ, तहसीलदार के साथ सारस बगली गांव गया था। मैंने अनशन धारियों से चर्चा भी की, लेकिन वह मानने तैयार नहीं है। जबकि मामला परिवाद के रूप में न्यायालय में लगा हुआ है। तेंदूखेड़ा जनपद सीईओ मनीष बागरी का कहना है कि मैने अनशन धारियों से गांव जाकर चर्चा की है। रिकवरी की राशि वसूली की प्रकिया की कार्रवाई चल रही है ये जानकारी दी थी, लेकिन वह अनशन से उठने तैयार नहीं हैं।
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