दमोह के जनपद पंचायत तेंदूखेड़ा अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत सारसबगली में 12 फरवरी से नौ ग्रामीण अनशन पर बैठे थे, जिन पर कार्रवाई करने दूसरे पक्ष के लोगों ने एसडीएम को ज्ञापन दिया। उसके बाद गुरुवार को रातों रात अनशनकारी गायब हो गए। शनिवार सुबह अनशन स्थल खाली देख ग्रामीण हैरान रह गए, जिसकी सूचना अधिकारियों को दी गई। शुक्रवार को उनकी कोई जानकारी नहीं मिली। शनिवार को एक अनशनकारी से संपर्क हुआ तो उसने बताया कि वह भोपाल सीएम हाउस अपनी शिकायत लेकर पहुंचे हैं।
बता दें कि 12 फरवरी से ग्राम सारसबगली के नौ ग्रामीण अनशन पर बैठ गए थे। उनकी मांग थी कि वर्ष 2021 में ग्राम पचायत सारसबगली के पूर्व सरपंच, सचिव और रोजगार सहायक के खिलाफ उन्होंने अनशन किया था और उनके द्वारा कराई गई जांच में भ्रष्टाचार सिद्ध हुआ था और 11 लाख 563 रुपये की रिकवरी निकली थी, जिसकी वसूली आज तक नहीं की गई। इसलिए हम लोगों ने रिकवरी की राशि जमा करवाने के लिए दोबारा अनशन शुरू किया और राशि जमा होने के बाद ही अनशन तोड़ने की बात कही।
गुरुवार को सारसबगली के दर्जनों ग्रामीण तेंदूखेड़ा एसडीएम को ज्ञापन देने पहुंचे और अनशन पर बैठे लोगों पर कार्रवाई की मांग की गई। उन्होंने कहा कि यदि अनशनकारियों पर कार्रवाई नहीं होती तो वह तहसील कार्यालय में आकर अनशन करेंगे। ये जो ग्रामीण अनशन पर बैठे हैं, इनके कारण गांव का विकास रूका हुआ है। दूसरा पक्ष जैसे ही तेंदूखेड़ा शिकायत करने पहुंचा, उसी रात अनशनधारी स्थल से गायब हो गए और शुक्रवार को जब ग्रामीणों ने अनशन स्थल खाली देखा, तब उन्हें जानकारी लगी। दूसरे पक्ष के लोगों ने बताया कि गुरुवार रात सारसबगली गांव में एक विवाह था। रात 12 बजे तक तो अनशनधारी अनशन स्थल पर बैठे थे। लेकिन रात को अचानक सभी नौ लोग गायब हो गए और अब उनका पता नहीं चल रहा कि कहां चले गए।
13 फरवरी को तेंदूखेड़ा एसडीएम ब्रजेश सिंह, तेंदूखेड़ा तहसीलदार उमेश तिवारी, जनपद सीईओ मनीष बागरी और तत्कालीन थाना प्रभारी गणेश प्रसाद दुबे अनशनकारियों से मिलने पहुंचे और उनकी मांगों का निराकरण करने के लिए कुछ समय मांगा था। लेकिन अनशनधारियों ने उनकी बात नहीं मानी थी। वहीं, लगातार चौथे दिन तक अनशन पर बैठे लोगों का स्वास्थय परीक्षण भी हो रहा था। स्वास्थ्य विभाग द्वारा पुष्टि की जा रही है, उसके अनुसार चौथे दिन भी सभी अनशनधारी पूरी तरह स्वस्थ थे। तेंदूखेड़ा सीबीएमओ आरआर बागरी ने बताया कि जो स्वास्थ परीक्षण में रिपोर्ट आई है, उसमें सभी अनशनधारी चौथे दिन भी स्वस्थ थे और शुगर बढ़ी हुई थी।
कलेक्टर ने दिया आश्वासन
अनशन पर बैठे ग्रामीण अचानक लापता हो गए और शुक्रवार को पूरे दिन जानकारी जुटाने के बाद वह नहीं मिले। लेकिन शनिवार को अनशनकारी दशरथ यादव से बात हुई तो उसने बताया कि जिले के अधिकारियों से चौथे दिन भी कोई उचित आश्वासन नहीं मिला। इसलिए हम लोग गुरुवार रात मुख्यमंत्री मोहन यादव से मिलने भोपाल निकल गए थे। हालांकि, वहां मुख्यमंत्री नहीं मिले। निज सचिव को पूरे मामले से अवगत कराया और उन्होंने तत्काल दमोह कलेक्टर से बात की और कलेक्टर द्वारा सोमवार को शाम पांच बजे मिलने दमोह बुलाया है। उनके आश्वासन पर अनशन खत्म किया गया है।