मकर संक्राति के पर्व पर दमोह जिले के प्रसिद्ध स्थानों पर मेले का आयोजन किया जाता है। उन्हीं में से एक है तेंदूखेड़ा ब्लॉक का टपका सिद्ध क्षेत्र, जहां सोमवार को मकर संक्रांति पर मेले का आयोजन किया गया। यहां बने कुंड को टपका इसलिए कहते हैं, क्योंकि पत्थरों के बीच से यहां पानी एक खाई में टपकता है, जो कुंड में तब्दील है। बूंदों के लगातार टपकते रहने से इसका नाम टपका पड़ गया।
यह रहस्य आज भी कोई नहीं समझ सका कि आखिर यह पानी कहां से इन पत्थरों से गिर रहा है। सोमवार को यहां भरे मेले में शामिल होने के लिए जिले भर से लोग पहुंचे। वैसे तो जिले के कई सिद्ध स्थानों पर संक्राति पर्व पर मेला भरता है। लेकिन टपका सिद्ध क्षेत्र काफी प्रसिद्ध है। कहीं यह मेले साप्ताहित होते हैं तो कहीं पर एक दिवसीय आयोजन होता है।
यह है टपका की कहानी
टपका सिद्ध क्षेत्र तेंदूखेड़ा ब्लॉक की ग्राम पंचायत बगदरी के गुबरा गांव में आने वाला सिद्ध क्षेत्र है। यहां ग्रामीण तो निवास करते हैं, साथ ही जंगली क्षेत्र भी है। यह स्थान जंगली क्षेत्र के अधीन ही आता है। यहां की एक खासियत है, यहां पत्थरों से पानी रिसता है। जो एक कुंड में टपकता है। इसलिए इसका नाम टपका पड़ गया और दूसरी खासियत यह है कि यहां जैसे-जैसे लोगों की आवाजाही बढ़ती है, पानी भी उसी तेजी के साथ पत्थरों से टपकता है। मकर संक्रांति पर इस स्थान पर सैकड़ों वर्ष से मेला आयोजित होता आ रहा है। यहां विराजमान सिद्ध बाबा महाराज की पूजा होती है। इस मेले में आसपास के कई गांव व दूरदराज के लोग शामिल हाेते हैं।
यहां लगते हैं सप्ताह भर मेले
पंडा बाबा जबलपुर मार्ग पर पड़ने बाला सिद्ध क्षेत्र है। यहां पंडा बाबा की झिरिया प्रसिद्ध है, जिनकी गहराई कहने के लिए तो मात्र दो फीट है। लेकिन यहां पानी कभी खत्म नहीं होता। जब क्षेत्र में भीषण गर्मी पड़ती है और आसपास के जल स्रोत का पानी खत्म हो जाता है तो लोग इन झिरिया के पानी से पूर्ति करते हैं। इस सिद्ध स्थान पर भी मकर सक्रांति के दिन से मेला लगना शुरू हो जाता है, जो पूरे एक सप्ताह तक भरता है। यहां दमोह की अपेक्षा जबलपुर जिले से ज्यादा लोग आते हैं। इसी तरह किशनगढ़ क्षेत्र में भी मकर सक्रांति से मेला आरंभ होता है, जो पूरे एक सप्ताह तक चलता है।