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Damoh: आदिवासी बच्ची की कुपोषण से मौत, मानव अधिकार आयोग ने महिला एवं बाल विकास विभाग और कलेक्टर से मांगा जवाब

Wed, 10 May 2023 05:17 PM IST
अंकिता विश्वकर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दमोह

सार

दमोह के घुटरियां गांव में एक डेढ़ साल की आदिवासी बच्ची की कुपोषण से मौत का मामला सामने आया है। मानव अधिकार आयोग ने मामले को संज्ञान में लेकर जिम्मेदारों से 20 दिन के भीतर जवाब मांगा है।
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वह बच्ची जिसकी कुपोषण से मौत हुई है (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला
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दमोह जिले के तेंदूखेड़ा के घुटरिया गांव में एक डेढ़ साल की आदिवासी बच्ची की कुपोषण से मौत हो गई। बच्ची की तबीयत खराब होने पर उसे जिला अस्पताल में भर्ती किया गया था, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। कुपोषण से बच्ची की मौत होने के बाद प्रशासन हरकत में आया है। बच्ची का वजन महज पांच किलो था और खून की भी कमी थी। इस संबंध में महिला एवं बाल विकास विभाग की टीम ने  ग्राम घुटरिया पहुंचकर मामले की जानकारी ली। वहीं, मध्यप्रदेश मानव अधिकार आयोग के अध्यक्ष मनोहर ममतानी ने अति कुपोषित बच्ची की मौत का मामला संज्ञान में आने के बाद संबंधितों से इसका जवाब मांगा है।
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बताया जा रहा है कि चार दिन पहले बच्ची की तबीयत बिगड़ने पर आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के माध्यम से उसे तेंदूखेड़ा स्वास्थ्य केंद्र लाया गया। जहां उसका स्वास्थ्य परीक्षण किया गया और बाद में उसे जिला अस्पताल इलाज के लिए भेजा गया, जहां उसकी मौत हो गई। 19 माह की बच्ची की मौत को लेकर तेंदूखेड़ा स्वास्थ्य केंद्र के सीबीएमओ डॉ. आर. आर. बागरी ने बताया कि मासूम बच्ची का नाम दुर्गा पुत्री नारायण आदिवासी है। दुर्गा तेंदूखेड़ा ब्लॉक के घुटरिया की निवासी थी, जिसे अमवाही गांव की आंगनवाड़ी कार्यकर्ता संध्या शर्मा द्वारा पांच मई को जांच के लिए लाया गया था। दुर्गा की जांच एनसीआर में हुई थी, जिसमें दुर्गा का वजन पांच किलो 350 ग्राम निकला था। हीमोग्लोबिन 6.6 ग्राम था, जबकि इस उम्र में बच्ची का सामान्य वजन 10 किलो और हीमोग्लोबिन 11 ग्राम होना चाहिए। बच्ची के टीकाकरण का कार्य दस फरवरी को पूरा हो गया था। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार दुर्गा को जब तेंदूखेड़ा स्वास्थ्य केंद्र लाया गया तो उसे उल्टी-दस्त हो रहे थे। खून की मात्रा भी कम हो रही थी और वजन भी कम हो रहा था। इसलिए तेंदूखेड़ा में एनसीआर में एक दिन भर्ती करने के बाद उसे इलाज के लिए दमोह जिला अस्पताल के पोषण पुनर्वास केंद्र में भेजा गया था। जहां सोमवार को उसकी मौत हो गई। 



इस मामले में मध्यप्रदेश मानव अधिकार आयोग ने कलेक्टर एवं महिला एवं बाल विकास अधिकारी से प्रकरण की जांच कराकर डेढ़ वर्ष की बालिका के जन्म के बाद से क्षेत्र की शासकीय योजना के अनुसार उसमें पोषण विकास के लिए जिम्मेदार अधिकारी, कर्मचारियों द्वारा इस संबंध में की गई कार्रवाई एवं उचित देखभाल में यदि उपेक्षा की गई हो तो 20 दिन में जवाब मांगा है। इस मामले में जिला महिला एवं बाल विकास अधिकारी प्रदीप राय का कहना है कि अधिकारियों से इस मामले में जांच कराकर प्रतिवेदन कलेक्टर  के माध्यम से मानव अधिकार आयोग को भेजा जाएगा।
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