अकसर ये कहा जाता है कि भगवान के दर्शन करने के लिए सबसे आवश्यक होता है उनके प्रति सच्ची आस्था होना। इसी बात को सबसे ज्यादा महत्व भी दिया जाता है। लेकिन आज के समय सच्ची श्रद्धा से ज्यादा महत्व लोगों के कपड़ों को दिया जा रहा है। जी हां, अब भगवान के दर्शन करने के लिए भी कुछ रूढ़िवादी लोगों ने ड्रेस कोड डिसाइड किया है। यानि उन्हीं कपड़ों में दर्शन कर सकते हैं जो मंदिर के नियमों में बताए गए हैं।
ऐसा ही एक मामला उज्जैन से भी सामने आया जिसने महिलाओं को ये सोचने पर मजबूर कर दिया है कि अब वह मंदिर जाने से पहले क्या पहनें और क्या नहीं इस पर विचार करें। मामला सोमवार का है जब उज्जैन के प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर के गर्भगृह में एक युवती सूट सलवार पर साड़ी लपेटकर पहुंची तो वहां ड्यूटी पर तैनात गर्भगृह के निरीक्षक ने मंदिर की परंपरा का हवाला देते हुए उसे अंदर जाने से रोक लिया। बाद में उस युवती ने बाहर से ही महाकाल के दर्शन किए।
मंदिर की परंपरा के अनुसार पुरुष सोला और महिला साड़ी पहनकर ही गर्भगृह में प्रवेश कर सकती हैं। यह महिला भी सुबह के वक्त महाकाल के दर्शन करने आई थी। उसने सलवार सूट पर साड़ी लपेट रखी थी। उसी दौरान गर्भगृह के निरीक्षक राकेश श्रीवास्तव ने उसे देख लिया और अंदर प्रवेश करने की इजाजद नहीं दी। उसने महिला को कहा कि मंदिर की परंपरा के अनुसार सलवार सूट पर साड़ी लपेटना गलत है। ऐसे अंदर जाने की इजाजत नहीं दी जा सकती लेकिन आप बाहर से महाकाल के दर्शन कर सकती हैं।
गौरतलब है कि मंदिर के पुजारी ही परंपरा को कायम रखने के लिए मंदिर समिति पर दबाव बनाते हैं। इनमें से ही कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो गर्भगृह में लोगों से पैसे लेकर दर्शन कराते हैं जबकि कई लोग जो इस नियमानुसार ही वस्त्र पहनकर आते हैं उन्हें किसी ना किसी बहाने से बाहर रोक लिया जाता है।