मध्य प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष सत्यदेव कटारे ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान पर आरोप लगाया है कि उन्होंने अपनी भांजी रितु चौहान को अनुचित तरीके से एमपीपीएससी में सातवीं रैंक दिलाकर डिप्टी कलेक्टर बनाने में मदद की है।
कटारे का कहना है कि आरटीआई के जरिए जानकारी मांगे जाने पर यह जानकारी उपलब्ध नहीं कराई जा रही है।
जब मुख्यमंत्री के वकील ने कांग्रेस प्रवक्ता केके मिश्रा पर मानहानि का दावा ठोका उसी दिन नेता प्रतिपक्ष सत्यदेव कटारे ने मुख्यमंत्री पर दूसरा हमला बोल दिया।
कटारे ने कहा कि रितु चौहान को बचाने के लिए रिकार्ड संबंधी नियम बदल दिए गए और परीक्षा के रिकार्ड तीन माह में नष्ट करने के नियम बना दिए गए। पहले दो साल तक परीक्षा के रिकार्ड रखे जाते थे। खुद मुख्यमंत्री ने सदन के सामने कहा है कि रिकार्ड संबंधी नियम बदले गए हैं।
कटारे ने आरोप लगाए कि मनोहर दुबे पहले मुख्यमंत्री कार्यालय में कार्यरत थे, वहीं से सीधे आईएएस बनाया गया और बाद में पीएससी का सचिव बनाया गया ताकि अपने कामों को अंजाम दिया जा सके। कटारे ने कहा कि वर्ष 2009 में एक ही प्रश्न के समान उत्तर देने वाले दो उम्मीदवारों में से एक को तीन अंक और दूसरे को शून्य अंक दिए गए।
कटारे एमपीपीएससी में अनियमितताओं को गिनाते हुए कहा कि 2009 में एक ही पुस्तक से 75 प्रश्न पूछे गए, क्या यह फिक्सिंग नहीं है। कटारे ने कहा कि विवादास्पद श्रीकृष्ण शर्मा को पीएससी का परीक्षा नियंत्रक बनाया गया और बाद में वही आयुर्वेद परीक्षा का पर्चा लीक करने के आरोपों में जेल गए।
कटारे ने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री अपने ऊपर लगे आरोपों से स्वयं को मुक्त करने के बजाय मानहानि का मुकदमा लगाकर डराने का प्रयास कर रहे हैं।