जहां देश में कांग्रेस राज्यपालों को हटाने का विरोध कर रही है, वहीं मध्य प्रदेश में कांग्रेसी राज्यपाल रामनरेश यादव का इस्तीफा मांग रहे हैं। राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी के मध्य प्रदेश दौरे की पूर्व संध्या पर राज्यपाल पर कांग्रेस ने आरोप जड़ दिए हैं कि उन्होंने मध्य प्रदेश में शिवराज सरकार से हाथ मिला रखा है।
कुछ दिनों पहले इस तरह की खबरें भी आई थीं कि राज्यपाल रामनरेश यादव ने दिल्ली में गृहमंत्री राजनाथ सिंह से भी मुलाकात की थी। हालांकि इसकी राजभवन से पुष्टि नहीं हो सकी। रामनरेश यादव उत्तर प्रदेश के प्रमुख समाजवादी नेता रहे हैं। जब से व्यावसायिक परीक्षा मंडल (व्यापम) के भर्ती घोटाले में राजभवन का नाम आया है, कांग्रेस अपने आपको मुश्किल में पा रही है।
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान पर हमला करते समय उसे इस बात का जवाब भी देना पड़ता है कि राजभवन का नाम इस मामले में शामिल है। राज्यपाल रामनरेश यादव के निजी सहायक धनराज यादव के खिलाफ प्रकरण दर्ज है। धनराज यादव लंबे समय से रामनरेश यादव के साथ रहा है।
व्यापम घोटाले के प्रमुख आरोपी पंकज त्रिवेदी और नितिन महिंद्रा ने एसटीएफ को बताया है कि कम से कम तीन भर्तियां राजभवन से आने वाली सिफारिश पर की गई है। धनराज यादव की बेटी की भर्ती भी व्यावसायिक परीक्षा मंडल (व्यापम) के माध्यम से की गई है, जो जांच के घेरे में है।
कांग्रेस अब रामनरेश यादव से पीछा छुड़ाना चाहती है ताकि वह राज्य सरकार और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान पर हमले तेज कर सके। यही कारण है कि मध्य प्रदेश के प्रमुख कांग्रेस नेता अजय सिंह राहुल के हवाले से खबरों में कहा गया है कि राज्यपाल रामनरेश यादव ने शिवराज सरकार से मिलीभगत कर रखी है। अजय सिंह ने कहा है कि अगर वह राज्यपाल होते तो इस्तीफा दे देते।
कांग्रेस जिस तरह से मुख्यमंत्री और भाजपा सरकार को निशाना बना रही है और विधानसभा सत्र के दौरान उसकी तीखे हमले करने की योजना है, कांग्रेस बिलकुल नहीं चाहे कि सरकार राज्यपाल रामनरेश यादव की आड़ में अपना बचाव करे।