फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

छतरपुर: कलेक्टर के सामने छात्रा ने काटी हाथ की नस, जनसुनवाई में संतुष्ट जवाब न मिलने के चलते उठाया कदम

Wed, 27 Apr 2022 12:20 PM IST
अंकिता विश्वकर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, छतरपुर

सार

छतरपुर जिले में जनसुनवाई में पहुंची एक छात्रा ने न्याय न मिलने पर अपने नाखून से ही अपने हाथ की नस काट ली। फिलहाल छात्रा का इलाज जिला अस्पताल में जारी है।
विज्ञापन
छात्रा को इलाज के लिए ले जाती पुलिसकर्मी। - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

छतरपुर जिल में जनसुनवाई में पहुंची एक कॉलेज की छात्रा ने कलेक्टर के सामने भरी सभा में हाथ की नस काट ली, जिसके बाद छात्रा को गंभीर हालत में जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
विज्ञापन


जानकारी के अनुसार छतरपुर जिला पंचायत में चल रही जनसुनवाई में 23 वर्षीय कॉलेज छात्रा, कॉलेज की फीस माफ कराने और अपने भरण-पोषण के लिए आवेदन लेकर आई थी, जहां उसे संतुष्टि पूर्ण जवाब और न्याय न मिलने पर उसने कलेक्टर के सामने ही भरी सभा में अपने हाथ की नस काट ली।

मां पर लगाया भरण-पोषण न करने का आरोप
अस्पताल में भर्ती छात्रा सविता दुबे ने बताया कि वह 6 बहनें 1 भाई हैं। पिता नरेंद्र दुबे कृषि विभाग में REAO के पद पर पदस्थ थे। जिनकी 14 जुलाई 2019 को मृत्यु हो गई है। पिताजी के रहते हुए मेरी 3 बड़ी बहनों की शादी हो चुकी है। माँ अपने 26 वर्षीय बेटे के साथ अलग रहती हैं। उन्हें अपने बेटे भर से प्यार है, अपनी सगी लड़कियों से नहीं। पिताजी की सर्विस में नॉमिनी माँ ही थीं तो नौकरी/बीमा का सारा पैसा माँ को ही मिला है और पेंशन भी माँ को ही मिलती है। हम लोगों को 1 पैसा भी नहीं मिलता। पीड़िता ने बताया कि हम 3 बहनें किराए के मकान में अलग रहकर अपनी पढ़ाई और भरण-पोषण खुद ट्यूशन पढ़कर करती हैं।
विज्ञापन


ट्यूशन पढ़ाकर भरण-पोषण कर रहीं छात्राएं
छात्रा ने बताया कि वह महाराजा कॉलेज में BA की छात्रा है। उसकी छोटी बहन मुस्कान (17 साल) मुस्कान BA कर रही है। वहीं, बड़ी बहन 26 वर्षीय कविता शहर के अवंतीबाई प्राईवेट कॉलेज से BSC-BED कर रही है, जो प्रथम सेमेस्टर की छात्रा है। जिसकी 22 हजार रुपये सालाना के हिसाब से 70 -80 हजार रुपये फीस भरना है, जो कि हमारे पास नहीं है। फीस बहुत ज्यादा है अभी हाल ही में हमने व्यवस्था करके (ट्यूशन पढ़ाकर) कुछ जमा की है। अब हमारे पास पैसा नहीं ही और फीस भरना है। जिसके लिए हम जनसुनवाई में गये थे कि हमारी फीस माफ करवाई जाये और भरण पोषण की व्यवस्था की जाए।

पहले भी जनसुनवाई में नहीं मिला न्याय
सविता ने बताया कि वह इससे पहले भी जनसुनवाई में आ चुकी है, पिछली बार वह आई थी तो उसे महिला बाल विकास और वन स्टॉप सेंटर भेज गया था, जहां उन्होंने साफ कह दिया था कि हम कुछ मदद नहीं कर सकते। इस बार मैं फिर से जनसुनवाई में आई थी, पर इस बार भी वही हुआ कलेक्टर साहब ने महिला बाल विकास और SDM को बोला तो मुझे गुस्सा आ गया और मैंने अपना ही आवेदन फाड़ते हुए अपने हाथ के नाखूनों से अपने ही हाथ की नश काट ली। जहां महिला गार्ड और SDM ने छात्रा को जिला अस्पताल पहुंचाया। फिलहाल छात्रा जिला अस्पताल के फीमेल सर्जिकल वार्ड में एडमिट है जहां उसका इलाज चल रहा है और उसकी हालत स्थिर बताई जा रही है।
विज्ञापन

 
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें