केंद्र सरकार ने 25 जनवरी को पद्म पुरस्कारों का एलान कर दिया है। देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान को तीन कैटेगरी में बांटा गया है, इसमें पद्म भूषण, पद्म विभूषण और पद्म श्री शामिल हैं। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 139 पद्म पुरस्कारों की घोषणा की है। इसमें सात पद्म विभूषण, 19 पद्म भूषण और 113 पद्मश्री शामिल हैं।
गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर भारत सरकार ने पद्म पुरस्कारों की घोषणा कर दी है। गृह मंत्रालय ने बताया कि मध्यप्रदेश की उद्यमी सैली होलकर, जगदीश जोशीला, भेरू सिंह चौहान, बुधेंद्र कुमार जैन और हरचंदन सिंह भाटी समेत 30 हस्तियों को पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया है।
बता दें कि 82 वर्षीय सैली होलकर को पद्मश्री से सम्मानित किया जाएगा। इन्हें होल्कर आशा के बुनकर के नाम से भी जाना जाता है। उन्होंने 300 साल पुराने माहेश्वरी हैंडलू इंडस्ट्री को पुनर्जीवित करने में अहम योगदान दिया है। एमपी के 75 वर्षीय निमादी और हिंदी लेखक जगदीश जोशीला को भी पद्मश्री से सम्मानित किया जाएगा। वह पहले निमादी लेखक हैं।
मध्यप्रदेश के निर्गुण भक्ति के भेरू सिंह चौहान को निर्गुण भजन और मालवा संस्कृति में अहम भूमिका निभाने के लिए पद्मश्री से सम्मानित किया जाएगा। बुधेंद्र कुमार जैन और हरचंदन सिंह भट्टी भी इस लिस्ट में शामिल हैं।
पिता से मिली लोक गायन शैली की विरासत
भैरू सिंह चौहान बचपन से ही पारंपरिक मालवी लोक शैली में भजन गायन से जुड़े रहे। वे भक्ति संगीत की मंडलियों में भजन गाया करते थे। संत कबीर, गोरक्षनाथ, संत दादु, संत मीराबाई, पलटुदास और अन्य संतों की वाणियों को गाया करते थे। उन्हें ये कला विरासत में मिली है। इनके पिता माधु सिंह चौहान भी लोक गायन किया करते थे।
60 से ज्यादा किताबे लिख चुके जगदीश जोशीला
निमाड़ के उपन्यासकार जगदीश जोशीला गोगांवा पांच दशक से हिंदी साहित्य व लोकभाषा निमाड़ी में सृजन कर रहे हैं। उन्होंने साहित्य की हर विधा में कलम चलाई है। उनकी 60 से ज्यादा पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। उनके उपन्यास देवीश्री अहिल्याबाई, जननायक टंट्या मामा, संत सिंगाजी, राणा बख्तावर सिंह, आद्यगुरु शंकराचार्य समेत कई ऐतिहासिक उपन्यास चर्चित रहे हैं।