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प्रदेश में तीन साल में खत्म होगा नशे का नेटवर्क,500 से ज्यादा छात्रों वाले कॉलेज में बनेंगी एंटी ड्रग कमेटियां

Thu, 22 Oct 2026 08:51 PM IST
Anand Pawar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल

सार

मध्य प्रदेश में नशे के अवैध कारोबार को खत्म करने के लिए सरकार अगले दो-तीन वर्षों में विशेष अभियान चलाएगी। शुरुआत में 500 से अधिक विद्यार्थियों वाले उच्च शिक्षण संस्थानों में एंटी ड्रग समितियां बनेंगी, जबकि ड्रग तस्करी के खिलाफ कार्रवाई में अब तक 446 करोड़ रुपये की संपत्ति अटैच की जा चुकी है।
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मुख्य सचिव अशोक वर्णवाल बैठक में - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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प्रदेश में अवैध मादक पदार्थों के कारोबार पर अंकुश लगाने के लिए सरकार अगले दो-तीन वर्षों में ड्रग नेटवर्क को खत्म करने के लक्ष्य के साथ विशेष अभियान चलाएगी। इसके तहत पुलिस और संबंधित विभागों के बीच समन्वय बढ़ाने, सूचना तंत्र मजबूत करने और शिक्षण संस्थानों में नशे के खिलाफ जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया जाएगा।  शुरुआत में 500 से अधिक विद्यार्थियों वाले उच्च शिक्षण संस्थानों में एंटी ड्रग समितियां गठित की जाएंगी। मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल ने गुरुवार को मंत्रालय में पांचवीं राज्य स्तरीय एनसीओआरडी बैठक में अधिकारियों को इस संबंध में निर्देश दिए। मुख्य सचिव ने कहा कि जिस तरह प्रदेश में नक्सलवाद को समाप्त किया गया है, उसी तरह अवैध मादक पदार्थों के पूरे नेटवर्क को खत्म करने के लिए गंभीरता से काम करना होगा। सभी विभाग तीन वर्षीय विशेष अभियान के लिए अपने लक्ष्य तय कर कार्ययोजना बनाएंगे। ड्रग नेटवर्क पर कार्रवाई के लिए नार्कोटिक्स वर्टिकल, एसआईबी और स्थानीय पुलिस के बीच बेहतर समन्वय करने के निर्देश भी दिए गए।
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नशीले पदार्थ नष्ट करने में एमपी पहले नंबर पर
बैठक में बताया गया कि मादक पदार्थों के विनष्टीकरण में मध्य प्रदेश देश में पहले स्थान पर है। वर्ष 2025 में अफीम, मॉर्फीन, कोडीन आदि से जुड़े 2073 प्रकरणों में 1,44,025 किलोग्राम मादक पदार्थ नष्ट किए गए। वर्ष 2026 में 30 सितंबर तक 2756 प्रकरणों में 1,30,380 किलोग्राम मादक पदार्थों का विनष्टीकरण किया गया। इस तरह दोनों अवधियों में कुल 2,74,405 किलोग्राम मादक पदार्थ नष्ट किए गए। ड्रग नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई में इस वर्ष 30 सितंबर तक एनडीपीएस एक्ट के 2986 मामलों में 4091 आरोपियों से 50,933 किलोग्राम मादक पदार्थ जब्त किए गए। वहीं, वर्ष 2025-26 में मध्य प्रदेश पुलिस, नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी), डीआरआई और सीबीएन ने प्रदेश में मादक पदार्थ बनाने वाली 18 गुप्त प्रयोगशालाओं को ध्वस्त किया। 
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नशा मुक्ति के लिए स्कूल-कॉलेजों में अभियान
मुख्य सचिव ने सरकारी और निजी शिक्षण संस्थानों में नशामुक्त विद्यालय अभियान चलाने के निर्देश दिए। 500 से अधिक विद्यार्थियों वाले संस्थानों में शिक्षकों, अभिभावकों, विद्यार्थियों, उच्च शिक्षा और सामाजिक न्याय विभाग तथा पुलिस को शामिल करते हुए एंटी ड्रग समितियां बनाई जाएंगी। इन समितियों का नोडल अधिकारी संबंधित थाने का बीट इंचार्ज होगा। नशे से जुड़े मामलों की सूचना देने वाले विद्यार्थियों और शिक्षकों की पहचान गोपनीय रखने के लिए व्यवस्था विकसित की जाएगी। मादक पदार्थों से संबंधित सूचना देने के लिए हेल्पलाइन नंबर 1933 का व्यापक प्रचार-प्रसार भी किया जाएगा। मुख्य सचिव ने सामाजिक न्याय विभाग को निर्देश दिए कि जिन जिलों में नशामुक्ति केंद्र नहीं हैं, वहां 31 अक्तूबर तक प्रस्ताव प्राप्त कर प्रदेश के सभी जिलों में केंद्र स्थापित करने की दिशा में कार्रवाई की जाए। वर्तमान में सामाजिक न्याय विभाग के 31 और स्वास्थ्य विभाग के 10 नशामुक्ति केंद्र संचालित हैं।
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446 करोड़ की संपत्ति अटैच
बैठक में बताया गया कि मादक पदार्थों के अवैध कारोबार में शामिल लोगों के खिलाफ संपत्ति अटैच करने की कार्रवाई भी की गई है। वर्ष 2025 में एनडीपीएस के 54 प्रकरणों में 300 करोड़ रुपये और वर्ष 2026 में 38 प्रकरणों में 146 करोड़ रुपये की संपत्ति अटैच की गई। सितंबर 2026 तक एनडीपीएस के 201 विशेष ट्रायल मामलों को निगरानी में लिया गया था। इसी अवधि में न्यायालयों में लंबित मामलों में आठ में दोषसिद्धि हुई। प्रदेश में वर्ष 2025-26 के दौरान मानस पोर्टल और हेल्पलाइन पर मादक पदार्थों से जुड़ी 811 शिकायतें प्राप्त हुईं। मुख्य सचिव ने सूचना तंत्र मजबूत करने, सूचना देने वालों को प्रोत्साहन राशि बढ़ाने और जब्ती से जुड़े अधिकारों को राज्य स्तर से जिला स्तर तक विकेंद्रित करने के निर्देश दिए। 

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केमिकल फैक्ट्रियों और कफ सिरप पर निगरानी
मुख्य सचिव ने उद्योग, श्रम, स्वास्थ्य और गृह विभाग को केमिकल फैक्ट्रियों में इस्तेमाल होने वाले प्रीकर्सर रसायनों के अवैध इस्तेमाल और डायवर्जन को रोकने के लिए संयुक्त कार्ययोजना बनाने को कहा। औद्योगिक क्लस्टरों और एसोसिएशनों की सूची साझा करने तथा उल्लंघन मिलने पर कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए। कोडीन आधारित कफ सिरप के उत्पादन, आपूर्ति और वितरण नेटवर्क की निगरानी करने और लाइसेंस प्रक्रिया को समेकित करने पर भी जोर दिया गया। इसके अलावा एफएसएल को एनडीपीएस एक्ट के तहत भेजे गए नमूनों की जांच रिपोर्ट 15 दिन में प्राप्त करने के लिए कार्ययोजना बनाने को कहा गया। बैठक में बताया गया कि प्रदेश में नशे के खिलाफ जागरूकता के 30,339 कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनमें करीब 2.58 करोड़ लोगों ने भाग लिया। 'नशे से दूरी है जरूरी' अभियान के सोशल मीडिया माध्यमों से 58 करोड़ से अधिक व्यूज मिले, जबकि करीब 10 हजार युवाओं को विभिन्न खेल गतिविधियों से जोड़ा गया।
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