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MP News: मध्य प्रदेश में बढ़ती आत्महत्याएं चिंता का विषय,15 हजार के आंकड़ों के साथ देश में तीसरे स्थान पर एमपी

Fri, 08 May 2026 06:17 AM IST
Anand Pawar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल

सार

मध्य प्रदेश में आत्महत्या, महिला अपराध और बच्चों के खिलाफ बढ़ते अपराधों ने चिंता बढ़ा दी है। एनसीआरबी की ताजा रिपोर्ट में प्रदेश कई गंभीर अपराध श्रेणियों में देश के शीर्ष राज्यों में शामिल पाया गया है।
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(प्रतीकात्मक फोटो) - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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मध्य प्रदेश में आत्महत्या के लगातार बढ़ते मामले सामाजिक और मानसिक स्वास्थ्य व्यवस्था के सामने बड़ा सवाल खड़ा कर रहे हैं। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की नवीन रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश में एक साल के दौरान 15 हजार 491 लोगों ने आत्महत्या की। यह संख्या देश में दर्ज कुल आत्महत्याओं का करीब 9.1 प्रतिशत है। इस आंकड़े के साथ मध्य प्रदेश देश में तीसरे स्थान पर पहुंच गया है। रिपोर्ट के अनुसार आत्महत्या के पीछे बीमारी, पारिवारिक विवाद, आर्थिक दबाव, मानसिक अवसाद और भविष्य को लेकर असुरक्षा जैसी वजहें प्रमुख रूप से सामने आई हैं। प्रदेश में 3 हजार से अधिक लोगों ने गंभीर बीमारियों से परेशान होकर आत्महत्या की। विशेषज्ञों का कहना है कि मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की कमी और समय पर काउंसलिंग नहीं मिलना भी बड़ी वजह बन रहा है।
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गृहिणियों के बीच आत्महत्या के केसों में बढ़ोतरी
प्रदेश में महिलाओं, खासकर गृहिणियों के बीच आत्महत्या के मामलों में बढ़ोतरी ने चिंता और बढ़ा दी है। घरेलू तनाव, पारिवारिक जिम्मेदारियां और आर्थिक दबाव इसके प्रमुख कारण माने जा रहे हैं। वहीं युवाओं और छात्रों में भी हालात चिंताजनक बने हुए हैं। पढ़ाई का दबाव, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी और करियर को लेकर असफलता का डर कई छात्रों को मानसिक तनाव की ओर धकेल रहा है। 
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खेती-किसानी से जुड़े लोगों के मामले भी आए सामने
खेती-किसानी से जुड़े लोगों में भी आत्महत्या के मामले सामने आए हैं। फसल नुकसान, कर्ज और आय की अनिश्चितता ग्रामीण क्षेत्रों में बड़ा कारण बनकर उभरे हैं। इसके अलावा सरकारी और निजी क्षेत्र में काम करने वाले कर्मचारियों के बीच भी तनाव और अवसाद से जुड़े मामले बढ़े हैं। 

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महिला अपराधों में भी प्रदेश शीर्ष राज्यों में शामिल
एनसीआरबी रिपोर्ट में महिलाओं के खिलाफ अपराधों को लेकर भी मध्य प्रदेश की स्थिति चिंताजनक बताई गई है। प्रदेश देश के उन राज्यों में शामिल है जहां महिलाओं से जुड़े अपराधों की संख्या लगातार अधिक बनी हुई है। वर्ष 2024 में प्रदेश में 32 हजार से ज्यादा महिला अपराध दर्ज किए गए। औसतन हर दिन बड़ी संख्या में महिलाओं के खिलाफ अपराध सामने आ रहे हैं। महिलाओं के साथ शारीरिक शोषण और उत्पीड़न के मामलों में भी प्रदेश राष्ट्रीय स्तर पर प्रमुख राज्यों में शामिल रहा। बड़े शहरों की बात करें तो इंदौर महिला अपराध के मामलों में देश के प्रमुख शहरों की सूची में शामिल है, हालांकि पिछले वर्ष की तुलना में मामूली कमी दर्ज की गई है। 

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बच्चों के खिलाफ अपराधों ने बढ़ाई चिंता
बच्चों से जुड़े अपराधों में भी मध्य प्रदेश की स्थिति गंभीर बनी हुई है। रिपोर्ट के मुताबिक प्रदेश देश के उन राज्यों में शामिल है जहां बच्चों के खिलाफ अपराध तेजी से बढ़ रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि साइबर अपराध, बाल शोषण और सामाजिक असुरक्षा इसके प्रमुख कारण हैं। 

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एससी-एसटी वर्ग के खिलाफ अपराधों में भी स्थिति गंभीर
अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग के खिलाफ होने वाले अपराधों में भी मध्य प्रदेश का नाम शीर्ष राज्यों में शामिल है। विशेष रूप से आदिवासी वर्ग के खिलाफ अपराधों को लेकर प्रदेश की स्थिति अधिक गंभीर बताई गई है। सामाजिक विशेषज्ञों का कहना है कि बढ़ते आत्महत्या और अपराध के मामलों को केवल कानून व्यवस्था का विषय मानना पर्याप्त नहीं होगा। इसके लिए मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने, सामाजिक जागरूकता बढ़ाने, परिवार स्तर पर संवाद बढ़ाने और युवाओं को भावनात्मक सहयोग उपलब्ध कराने की जरूरत है।
 
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