इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इन्क्लूसिव अलायंस (इंडिया) गठबंधन का भोपाल रैली में लिटमस टेस्ट होगा। अक्टूबर के पहले सप्ताह में होने वाली बैठक में तय होगा कि गठबंधन में शामिल पार्टियां मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में सत्तारूढ़ भाजपा के खिलाफ साझा उम्मीदवार के साथ चुनाव लड़ेंगी या फिर अलग-अलग प्रत्याशी उतारेंगी।
विधानसभा चुनाव के लिए राजनीतिक दलों ने तैयारी तेज कर दी है। भाजपा को घेरने के लिए विपक्षी दलों ने केंद्रीय स्तर पर इंडिया गठबंधन बनाया है। हालांकि, मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में गठबंधन की सुगबुगाहट अब तक नहीं दिखी है। अब इंडिया गठबंधन की अक्टूबर के पहले सप्ताह में भोपाल में रैली और बैठक होना तय किया गया है। ऐसे में माना जा रहा है कि भोपाल इंडिया गठबंधन का लिटमस टेस्ट होगा, क्योंकि यहां पता चल जाएगा कि गठबंधन 2024 के चुनाव के लिए एक हैं या नहीं। अब तक गठबंधन की पटना, बेंगलुरू और मुंबई में तीन बैठकें हो चुकी हैं। इसमें यह तय नहीं हो पाया है कि असल में ये एकजुट हैं या नहीं? अब तक गठबंधन की 26 विपक्षी पार्टियां अपना नेता नहीं चुन सकी हैं। ये दल अब तक यह नहीं कर पाए है कि एक साथ चुनाव लड़ेंगे या अलग-अलग। ऐसे में अब भोपाल की बैठक और रैली में इन सभी सवालों के जवाब मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
आप ने अलग से उतारे प्रत्याशी, कांग्रेस कर रही इंतजार
मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा, आप, सपा और बसपा ने अपने प्रत्याशियों की पहली सूची जारी कर दी है। इंडिया गठबंधन का हिस्सा आप और सपा ने भी मध्य प्रदेश में 10 और सात प्रत्याशियों के नाम का एलान कर दिया है। वहीं, दूसरी तरफ अभी कांग्रेस प्रत्याशियों की सूची जारी करने का इंतजार कर रही है। इसके पीछे की वजह कांग्रेस की जन आक्रोश यात्रा और इंडिया गठबंधन की बैठक बताई जा रही है। जानकारों का कहना है कि गठबंधन की बैठक तक कांग्रेस टिकट कटने की कार्यकर्ताओं की नाराजगी से बचना चाहती है। साथ ही दूसरा कारण गठबंधन में साझा उम्मीदवारों को लेकर फैसले का इंतजार करना भी बताया जा रहा है।
आप को मनाना बड़ी चुनौती
आम आदमी पार्टी ने वर्ष 2018 में 208 सीटों पर चुनाव लड़ा, जिसमें सभी की जमानत जब्त हुई। लेकिन पिछले नगरीय निकाय चुनाव में आप ने सिंगरौली में महापौर पद जीता। दो से तीन जगह आप के प्रत्याशी दूसरे नंबर पर रहे। वहीं, 47 पार्षद चुनाव जीते। विंध्य में पार्टी की लोकप्रियता बढ़ती जा रही है। आप को राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा मिल गया है। इससे पार्टी पहले ही उत्साहित है। आप ने पहले ही सभी सीटों पर चुनाव लड़ने का एलान किया है। दरअसल, पार्टी अधिक से अधिक जगह चुनाव लड़ कर इंडिया गठबंधन में अपनी स्थिति को मजबूत करना चाहती है। इससे गठबंधन में उसकी बातों का वजन ज्यादा होगा। वहीं, सपा ने भी अपने सात उम्मीदवार उतारे है। इसका प्रभाव ग्वालियर-चंबल और विंध्य के जिलों में है।
भोपाल में गठबंधन की दशा और दिशा तय होगी
वरिष्ठ पत्रकार प्रभु पटैरिया का कहना है कि इंडिया गठबंधन में शामिल दल पहली बार चुनावी राज्य में जुट रहे हैं। निश्चित ही यहां पर टिकटों के तालमेल को लेकर बात होगी। यदि यहां पर प्रत्याशियों के बारे में आपस में तालेमल कर लेते है तो गठबंधन सफल होता दिखाई देगा। उन्होंने कहा कि यदि ऐसा नहीं कर पाते है तो आगे गठबंधन में फूट पड़ सकती है। भोपाल की बैठक और रैली निश्चित ही गठबंधन की दशा और दिशा तय करेगी।