गोरखपुर की गीता प्रेस को साल 2021 का गांधी शांति पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। इसको लेकर राजनीति भी गरमा गई है। कांग्रेस के विरोध पर पलटवार कर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि गीता प्रेस को मिल रहे सम्मान का विरोध करने वालों को देश की जनता माफ नहीं करेगी। सीएम ने कहा कि मैंने भी धार्मिक साहित्य का अध्ययन गीता प्रेस से प्रकाशित पुस्तकों को पढ़कर ही किया। गीता प्रेस में प्रकाशित गीता और अन्य धार्मिक पुस्तकों ने देश में अध्यात्म को बढ़ाया है। उन्होंने कांग्रेस के विरोध को भारत की संस्कृति परंपरा और अध्यात्म का विरोध करना बताया।
वहीं, पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने कहा कि गीता प्रेस गोरखपुर का भारतीय संस्कृति, हिंदुत्व एवं अध्यात्म में हमेशा अद्वितीय योगदान रहा है। हिंदू समाज के सभी धर्मग्रंथ सरल, त्रुटिहीन एवं कम कीमत पर उपलब्ध कराए गए है। घर-घर में रामायण और गीता उनकी बदौलत भारत में सबको एवं विश्व में उपलब्ध कराई है। गीता प्रेस का किसी विवाद से कभी सरोकार नहीं रहा, उनके योदान के लिए नोबल पुरस्कार भी कम पड़ेगा। उन्होंने लिखा कि जयराम रमेश जैसे स्तर के लोग जो कांग्रेस के बड़े पदों पर बैठे हैं को शायद यही पता ना हो कि गीता प्रेस गोरखपुर में छपता क्या हैं?
उमा ने आगे कहा कि लगता है कि कांग्रेस ने अपनी पार्टी की इस्लामीकरण एवं ईसाईकरण की राह पकड़ ली है। बिना यह जाने कि ईसाई व मुसलमान जैसे समुदाय भी गीता प्रेस गोरखपुर के प्रति सम्मान का भाव रखते हैं। कांग्रेस के नेता का बयान घोर शर्मनाक एवं निंदनीय है। उन्होंने आग लिखा कि सोनिया गांधी अपने नेताओं के प्रति यदि सावधान न रही तो कांग्रेस को वोट के बदले सिर्फ घृणा एवं तिरस्कार मिलेगा। गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने कांग्रेस के विरोध पर कहा कि कांग्रेसियों द्वारा गीता प्रेस का विरोध पूर्वाग्रह से ग्रसित होना प्रदर्शित करता है , यही तुष्टिकरण की राजनीति हैं।