मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव
- फोटो : अमर उजाला
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि वाराणासी की जिला कोर्ट ने ज्ञानवापी मामले में जो फैसला किया यह एक तरह से मील का पत्थर रहेगा। उन्होंने कहा कि एएसआई की रिपोर्ट एक तथ्यात्मक रिपोर्ट है। रिपोर्ट यह बताती है कि यह फैसला किसके पक्ष में आना चाहिए वह अपने आप में इशारा बता रहा है। सारे प्रमाण के बाद भावनात्मक रूप से हिंदू समाज के लिए महत्वपूर्ण फैसला है।
पूर्व सीएम बोली- मथुरा और काशी में भी मूल स्थान पर बनें मंदिर
वहीं, पूर्व सीएम उमा भारती ने सोशल मीडिया पर लिखा कि ज्ञानवापी पर वाराणसी डिस्ट्रिक्ट कोर्ट का फैसला आया है। वह सुखद हैं। उन्होंने कहा मैंने स्वयं 1993 में ज्ञानवापी की दीवारों पर अंकित मूर्तियों की पूजा की है। उन्होंने का कि 1991 में भी मैंने संसद में यह प्रस्ताव रखा था कि अयोध्या, मथुरा, काशी तीनों को हिंदुओं को सौंप दीजिए। पूर्व सीएम ने कहा कि वाराणसी डिस्ट्रिक्ट कोर्ट के फैसले के बाद मैं फिर से अनुरोध करुंगी कि अयोध्या की ही तरह मथुरा और काशी में भी मूल स्थान पर मंदिर बने तथा पूजा का अधिकार मिले। उन्होंने कहा कि इसलिए इन्हें हिंदुओं को सौंप दीजिए। यही संपूर्ण समाधान है।