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MP News: बालाघाट के सोनेवानी और बैतूल के ताप्ती क्षेत्र को संरक्षित क्षेत्र घोषित करने को मिली मंजूरी

Wed, 21 May 2025 10:45 PM IST
आनंद पवार न्यूज डेस्क, भोपाल, मध्य प्रदेश

सार

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में आयोजित राज्य वन्यजीव बोर्ड की बैठक में कई अहम प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। बालाघाट और बैतूल जिलों के महत्वपूर्ण वन क्षेत्रों को संरक्षित क्षेत्र घोषित करने से लेकर असम से गैंडे लाने और गिद्धों व जलजीवों के संरक्षण तक सरकार ने व्यापक योजनाओं पर सहमति जताई है, जो राज्य के पर्यावरणीय भविष्य को नई दिशा देंगे।
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मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में बुधवार को आयोजित वाइल्ड लाइफ बोर्ड की बैठक में बालाघाट जिले के सोनेवानी और बैतूल जिले के ताप्ती क्षेत्र को संरक्षित क्षेत्र घोषित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। इस निर्णय से वन्यजीव संरक्षण को बल मिलेगा और पर्यावरणीय संतुलन के साथ-साथ पर्यटन को भी नई दिशा मिलेगी। स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर मिलने की संभावना है। बैठक में बताया गया कि सोनवानी क्षेत्र पहले ही 39 बाघों का स्थायी निवास बन चुका है, जबकि ताप्ती क्षेत्र में भी बाघों की मौजूदगी है। भैंसदेही विधायक महेंद्र सिंह चौहान की ओर से इन क्षेत्रों को संरक्षित क्षेत्र घोषित करने की मांग की गई थी। उन्होंने कहा कि इससे न केवल रोजगार बढ़ेगा बल्कि यह सुनिश्चित किया जाएगा कि गांवों का विस्थापन न हो। बोर्ड की स्वीकृति के बाद अब अधिसूचना जारी कर इन क्षेत्रों को विधिवत संरक्षित क्षेत्र घोषित किया जाएगा। बैतूल जिले में ताप्ती कंजर्वेशन रिजर्व (250 वर्ग किमी) और बालाघाट जिले में सोनेवानी कंजर्वेशन रिजर्व (163.195 वर्ग किमी) की स्थापना के प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किए गए। मुख्यमंत्री ने थलीय जीवों की तरह जलीय जीवों के संरक्षण के लिए पृथक अधिकारी नियुक्त करने के निर्देश दिए।
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हाथियों का करें स्थायी प्रबंधन
सोन नदी पर पुल निर्माण, पुलिस कैंप स्थापना सहित अन्य प्रस्तावों को भी मंजूरी मिली। मुख्यमंत्री ने हाथियों के स्थायी प्रबंधन और गिद्धों, चीलों व मगरमच्छों के संरक्षण की दिशा में प्रयास तेज करने के निर्देश दिए। उन्होंने इंदौर की तर्ज पर भोपाल के वन विहार में भी वन्य प्राणियों का पुनर्वास करने को कहा।  बैठक में यह भी बताया गया कि वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में अब 20 बाघ हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने निर्देश दिये कि प्रदेश के रिहायशी इलाकों में जंगली हाथियों की आमद और इनके उन्मुक्त आवागमन/आचरण पर अंकुश लगाएं। नई तकनीकों का इस्तेमाल करें जिनसे हाथियों की रिहायशी इलाकों तक पहुंच को रोका जा सके। उन्होंने कहा कि आवश्यकतानुसार व्यवस्थाएं कर जंगली हाथियों का स्थायी प्रबंधन करें ताकि इन्हें आबादी क्षेत्र से दूर रखा जा सके।

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बोत्सवाना से लाए जाएंगे पांच-पांच जिराफ और जेब्रा
मुख्य जीव अभिरक्षक एवं प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्य जीव) शुभरंजन सेन ने बताया कि वन्यजीवों के संरक्षण एवं संवर्धन में किए जा रहे कार्यों के संबंध में लघु फिल्में तैयार की जा रही हैं। मंगलूर जू कर्नाटक से दो किंग कोबरा लाकर वन विहार राष्ट्रीय उद्यान भोपाल में रखे गये हैं। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री की मंशा अनुसार बोत्सवाना से पांच जिराफ और पांच जेब्रा लेकर आने के लिए भी बोत्सवाना सरकार से चर्चा एवं समन्वय की कार्यवाही की जा रही है। इसके अलावा असम राज्य से वन भैंसा और गेंडा भी मध्यप्रदेश में लाने के प्रयास किये जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि मध्यप्रदेश राज्य में नर्मदा नदी एवं अन्य वेट लेण्डस के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए पचमढ़ी में जुलाई 2025 में राष्ट्रीय स्तर की कार्यशाला में जलीय जीवों के संरक्षण के लिए विशेष कार्ययोजना तैयार की जाएगी।

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गिद्धों के संरक्षण की दिशा में पहल
बैठक में सदस्यों ने गिद्धों के संरक्षण पर विशेष जोर देते हुए इनके आवासों को मजबूत करने की बात कही। मुख्यमंत्री ने बताया कि बुंदेलखंड क्षेत्र में गिद्धों की संख्या सबसे अधिक है, इसलिए इन्हें अन्य क्षेत्रों में भी पुनर्स्थापित करने की कार्ययोजना तैयार की जाएगी।
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सोन घड़ियाल क्षेत्र पर भी चर्चा
सोन घड़ियाल अभयारण्य को और मजबूत करने की बात कही गई। साथ ही जिन क्षेत्रों में घड़ियाल नहीं हैं, उन्हें राजस्व विभाग को सौंपने पर विचार हुआ। मुख्यमंत्री ने बताया कि इन क्षेत्रों में अवैध रेत खनन की घटनाएं हो रही हैं, जिसे नियंत्रित करने और राजस्व आय बढ़ाने के लिए यह कदम आवश्यक है। साथ ही घड़ियाल, कछुए, दुर्लभ मछलियों और अन्य जलजीवों के संरक्षण हेतु व्यापक कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश भी दिए गए।
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