नौरादेही और रानी दुर्गावती अभयारण्य को मिलाकर बना प्रदेश का सातवां टाइगर रिजर्व
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मध्य प्रदेश में सागर स्थित नौरादेही अभयारण और दमोह स्थित रानी दुर्गावती अभ्यारण को मिलकार नया सातवां टाइगर रिजर्व बनाया जाएगा। यह प्रदेश का सबसे बड़ा टाइगर रिजर्व होगा। इसका नाम वीरागंना दुर्गावती टाइगर रिजर्व होगा। यह सागर, दमोह और नरसिंहपुर तक फैला होगा। इस संबंध में मध्य प्रदेश शासन ने शुक्रवार को नोटिफिकेशन जारी कर दिया। इसके साथ ही मध्य प्रदेश देश में सबसे ज्यादा टाइगर रिजर्व वाला राज्य बन गया।
केन-बेतवा लिंक परियोजना में नए टाइगर रिजर्व को गठन किया जाना शामिल था। प्रधानमंत्री के पांच अक्टूबर के प्रदेश के दौरे से पहले इसके गठन को मंजूरी दे दी गई। नए टाइगर रिजर्व का एरिया 2339 वर्ग किमी का होगा। इसमें बफर एरिया 925 वर्ग किलोमीटर का होगा। यह अभयारण चीतों के लिए भी उपयुक्त माना गया है। अभी प्रदेश में सतपुड़ा, पन्ना, पेंच, बांधवगढ़, संजय दुबरी और कान्हा टाइगर रिजर्व है।
नौरादेही में 15 बाघ और 22 चीतें
नौरादेही अभयारण में अभी 15 बाघ है। इस एरिया में जंगली सूअर, नीलगाय, चिंकारा, चीतल, सांभर है। यहां जंगल और घास के बड़े मैदान होने के साथ ही तेंदुआ, भेडिया, जंगली कुत्ता जैसे वन्यप्राणी के अलावा 250 से ज्यादा प्रजातियों के पशु-पक्षी है। यहां करीब 22 तेंदुआ भी है। इसके अलावा मिश्रित और छिछले वन हैं। इसके अलावा कई प्रकार की झाड़ियां, बेल-लताएं, पेड़ और घास पाई जाती है।
नौरादेही अभयारण्य 1975 में बना
प्रदेश में नौरादेही अभयारण की स्थापना वर्ष 1975 में की गई। यहां पर बाघों की संख्या बढ़ाने के लिए भी काम हुआ। इसके लिए बाघ और बाघिन को छोड़ा गया। 2018 के बाद बाघों की संख्या 15 तक पहुंच गई। नए टाइगर रिजर्व से बाघों की वंशवृद्धि और बेहतर तरीके से होगी। इसके साथ ही रिजर्व क्षेत्र में पर्यटन को लेकर भी व्यवस्थाएं की जाएंगी। वर्तमान में नौरादेही के कुछ एरिया में ही पर्यटन सुविधा है, जहां न के बराबर सैलानी पहुंचते हैं।