पोस्टल बैलेट्स को लेकर जहां भाजपा पूरी तरह से बेफिक्र नजर आ रही है। वहीं कांग्रेस चिंतित है। डाक मत पत्र को लेकर कांग्रेस ने चुनाव आयोग से विशेष मांग की है। कांग्रेस का कहना है कि मताधिकार से वंचित शासकीय कर्मचारियों, पुलिसकर्मियों, अतिथि शिक्षकों को पोस्टल वोट से मतदान करने का अवसर दिया जाना चाहिए।
इसके लिए कांग्रेस ने खंडवा एसपी की पहल का उदहारण भी दिया है। कांग्रेस से पहले बीजेपी विधायक नारायण त्रिपाठी की विंध्य जनता पार्टी भी डाक मत पत्रों की गिनती को लेकर चुनाव आयोग के सामने मांग रख चुकी है कि डाक मत पत्रों का परिणाम अंत की जगह शुरू में ही घोषित किया जाए।
वोट से रह गए वंचित
बताया जा रहा है कि चुनाव ड्यूटी में लगे कर्मचारी-अधिकारी बड़ी संख्या में वोट नहीं कर पाए हैं। ऐसे में कांग्रेस डाक मत पत्रों को लेकर चुनाव आयोग से लगातार मांग उठा रही है। जानकारी के मुताबिक, रीवा जिले में विधानसभा निर्वाचन 2023 में तैनात 1369 पुलिस कर्मी व अतिथि शिक्षक मतदान से वंचित रह गए हैं।
क्यों महत्वपूर्ण हैं पोस्टल वोट
पिछले चुनाव के परिणाम पर नजर डालें तो समझ आएगा कि पोस्टल वोट क्यों महत्वपूर्ण हैं। विधानसभा चुनाव में कई सीटें ऐसी हैं, जहां डाक मत पत्रों से बढ़ी संख्या में वोटिंग हुई है। कई सीटों पर उनकी संख्या तीन हजार के भी पार है। इसके साथ ही 2018 के चुनाव में कई सीटें ऐसी हैं, जहां पर हार जीत का अंतर एक हजार वोट का भी नहीं था। ऐसे में राजनीतिक दल इस बार पोस्टल बैलेट को लेकर पहले से और अधिक गंभीर नजर आ रहे हैं।