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मध्यप्रदेश: भोपाल में 5.5 एकड़ जमीन का खेल! 55 हजार में नीलामी, अधिकारियों समेत चार दोषियों को 3 साल की सजा

Mon, 28 Sep 2026 06:07 PM IST
Anand Pawar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल

सार

भोपाल में किसान की 5.5 एकड़ जमीन महज 55 हजार रुपये में नीलाम करने के करीब 20 साल पुराने मामले में कोर्ट ने फैसला सुनाया है। विशेष न्यायालय ने धोखाधड़ी, षड्यंत्र और भ्रष्टाचार से जुड़े मामले में दोषियों को तीन-तीन साल के सश्रम कारावास की सजा दी है।
 
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कोर्ट। सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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भोपाल जिला सहकारी एवं ग्रामीण विकास बैंक की कृषि भूमि की नीलामी में पद का दुरुपयोग और षड्यंत्र कर अनियमितता करने के मामले में विशेष न्यायालय ने दोषी आरोपियों को सजा सुनाई है। मामला करीब 20 साल पुराना है, जिसमें किसान की 5.5 एकड़ जमीन को महज 55 हजार रुपये में नीलाम किए जाने का आरोप था। विशेष लोक अभियोजक डॉ. राम कुमार खत्री के मुताबिक, विशेष न्यायालय के न्यायाधीश मनोज कुमार सिंह ने मामले में आरोपियों को दोषी माना। धोखाधड़ी और आपराधिक षड्यंत्र से जुड़ी धारा 420 सहपठित 120-बी के तहत दोषी पाए गए आरोपियों को तीन-तीन साल के सश्रम कारावास और एक-एक हजार रुपये के अर्थदंड की सजा दी गई है। वहीं, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13(1)(डी) सहपठित 13(2) के तहत भी दोषी पाए गए अधिकारियों को तीन-तीन साल के सश्रम कारावास और एक-एक हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया गया है। 
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55 हजार में नीलाम कर दी थी 5.5 एकड़ जमीन
अभियोजन के अनुसार, ग्राम सिकंदराबाद, तहसील हुजूर निवासी किसान काशीराम पिता छोटेराम ने अपनी कृषि भूमि को बंधक रखकर ऋण लिया था। आरोप है कि वर्ष 2006-07 के दौरान बैंक के अधिकारियों ने नीलामी प्रक्रिया का पालन किए बिना किसान की करीब 5.5 एकड़ जमीन को सिर्फ 55 हजार रुपये में नीलाम कर दिया। अभियोजन का आरोप था कि जमीन की कीमत बाजार मूल्य और कलेक्टर द्वारा निर्धारित मूल्य की तुलना में काफी अधिक थी। इसके बावजूद आरोपियों ने नियमों को दरकिनार कर जमीन की नीलामी कराई। 
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नीलामी की नोटशीट में भी हेरफेर का आरोप
मामले में यह भी आरोप लगाया गया कि नीलामी प्रक्रिया से संबंधित नोटशीट और दस्तावेज तैयार कर संयुक्त पंजीयक, सहकारी संस्थाएं, भोपाल के समक्ष पुष्टि के लिए भेजे गए। इसके बाद नीलामी की पुष्टि का आदेश जारी किया गया। अभियोजन के मुताबिक, आरोपियों ने आपस में योजना बनाकर करीब 23 भूमि को नीलामी प्रक्रिया के जरिए एक ही खरीदार संजीव जॉन से खरीदवाया। मामले की लिखित शिकायत के आधार पर लोकायुक्त पुलिस ने जांच के बाद प्रकरण दर्ज किया। विवेचना पूरी होने के बाद न्यायालय में अभियोग पत्र पेश किया गया।

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साक्ष्यों और दस्तावेजों के आधार पर फैसला
सुनवाई के दौरान अभियोजन ने न्यायालय के समक्ष साक्ष्य, दस्तावेज और लिखित तर्क प्रस्तुत किए। न्यायालय ने अभियोजन के पक्ष से सहमत होते हुए आरोपियों को संबंधित धाराओं में दोषी ठहराया और सजा सुनाई। मामले में शासन की ओर से जिला अभियोजन अधिकारी एवं सहायक निदेशक अभियोजन डॉ. राम कुमार खत्री तथा विशेष लोक अभियोजक श्रीमती हेमलता कुशवाहा ने पैरवी की।
 
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