प्रदेश में प्रधानमंत्री जनधन योजना के तहत बड़े पैमाने पर बैंक खाते खोले गए हैं, लेकिन खातों में जमा रकम और सक्रियता के आंकड़े वित्तीय समावेशन की एक अलग तस्वीर भी सामने रख रहे हैं। राज्य में कुल 4.76 करोड़ जनधन खाते हैं, लेकिन इनमें औसतन सिर्फ 4,182.43 रुपये जमा हैं। वहीं 1.36 करोड़ खाते निष्क्रिय हैं और 46.72 लाख खातों में कोई राशि नहीं है। ये आंकड़े केंद्रीय वित्त मंत्रालय से आरटीआई के जरिए मिली जानकारी में सामने आए हैं। नीमच निवासी आरटीआई कार्यकर्ता चंद्रशेखर गौर की ओर से मांगी गई जानकारी के जवाब में मंत्रालय ने ये आंकड़े उपलब्ध कराए हैं। आंकड़े 12 अगस्त 2026 तक के हैं। जनधन खातों की संख्या के मामले में मध्य प्रदेश देश के अन्य राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में चौथे स्थान पर है। इससे आगे उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल हैं।
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कुल जमा राशि 19 हजार करोड़ से ज्यादा
मध्य प्रदेश में इन खातों में कुल जमा राशि 19,919.10 करोड़ रुपये है, जो राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में छठे सबसे बड़े जमा कोष में शामिल है। यानी खाते खोलने के पैमाने पर मध्य प्रदेश में वित्तीय समावेशन का बड़ा विस्तार हुआ है, लेकिन औसत जमा राशि का आंकड़ा कमजोर है।
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राष्ट्रीय औसत से 1,156 रुपये कम
मध्य प्रदेश में एक जनधन खाते में औसतन 4,182.43 रुपये जमा हैं, जबकि देश का औसत 5,338.64 रुपये है। इस तरह एमपी का औसत राष्ट्रीय स्तर से करीब 1,156 रुपये कम है। औसत खाते की शेष राशि के मामले में मध्यप्रदेश 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में निचले पायदान पर है। एमपी से कम औसत बैलेंस वाले राज्यों में आंध्र प्रदेश (4,103.44 रुपये), नागालैंड (3,785.29 रुपये), असम (2,873.86 रुपये) और मणिपुर (2,853.19 रुपये) शामिल हैं।
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1.82 करोड़ खातों में सक्रियता का सवाल
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक मध्य प्रदेश के 1.36 करोड़ जनधन खाते निष्क्रिय श्रेणी में हैं। इसके अलावा 46.72 लाख खातों में शून्य बैलेंस दर्ज है। यानी दोनों श्रेणियों को मिलाकर करीब 1.82 करोड़ खाते ऐसे हैं, जिनमें या तो लंबे समय से गतिविधि नहीं है या कोई राशि जमा नहीं है। यह आंकड़ा ऐसे समय में सामने आया है जब जनधन योजना का उद्देश्य बैंकिंग सेवाओं से वंचित लोगों को औपचारिक बैंकिंग व्यवस्था से जोड़ना रहा है।
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बड़े पैमाने पर खाते खुले, लेकिन बैलेंस कम
मध्य प्रदेश में जनधन खातों की संख्या और कुल जमा राशि देश के प्रमुख राज्यों में है। 4.76 करोड़ खाते और 19,919.10 करोड़ रुपये की जमा राशि वित्तीय पहुंच के बड़े पैमाने को दिखाती है। दूसरी ओर, प्रति खाते कम औसत जमा और बड़ी संख्या में निष्क्रिय या शून्य-बैलेंस खातों का आंकड़ा खातों के वास्तविक इस्तेमाल को लेकर अलग सवाल सामने रखता है। 12 अगस्त 2026 तक के केंद्रीय वित्त मंत्रालय के आंकड़ों के आधार पर यह तस्वीर मध्य प्रदेश में जनधन योजना के विस्तार और खातों की सक्रियता दोनों पहलुओं को एक साथ सामने रखती है।
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सरकार ने कहा- कई जानकारियां केंद्रीय स्तर पर नहीं रखी जातीं
वित्त मंत्रालय ने आरटीआई जवाब में यह भी स्पष्ट किया है कि पीएमजेडीवाय खातों के बैलेंस, जीरो बैलेंस खातों और इन ऑपरेटिव खातों का जेंडर-वाइज ब्योरा केंद्रीय स्तर पर मेंटेन नहीं किया जाता। इसके अलावा आरटीआई में मांगी गई कुछ अन्य जानकारियों के बारे में मंत्रालय ने कहा कि ऐसी जानकारी केंद्रीय स्तर पर उपलब्ध नहीं रखी जाती। वित्तीय सेवा विभाग के अंडर सेक्रेटरी और सीपीआईओ सुरिंदर कुमार की ओर से 1 सितंबर 2026 को जारी जवाब में कहा गया है कि आरटीआई कानून के तहत वही सूचना उपलब्ध कराई जा सकती है जो संबंधित लोक प्राधिकरण के पास उपलब्ध और रिकॉर्ड में मौजूद हो।